वाशिंगटन, डी.सी. – अमेरिका की कोर्ट ऑफ अपील्स के डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट की एक तीन सदस्यीय पैनल ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पेंटागन को ट्रांसजेंडर सैनिकों को हटाने से रोक दिया है। इस 2-1 निर्णय में न्यायालय ने पेंटागन की 2025 की नीति को अवैध माना और कहा कि यह नीति “राजनीतिक रूप से अलोकप्रिय समूह को हानि पहुँचाने की सीधे इच्छा” से प्रेरित थी।
यह फैसला ट्रांसजेंडर सैनिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी जीत मानी जा रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी नीतियाँ संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए बनानी चाहिए, न कि किसी विशेष समूह को निशाना बनाकर।
पेंटागन ने पहले ऐलान किया था कि वह 2025 से ट्रांसजेंडर सैनिकों के सेवा करने पर प्रतिबंध लगा देगा, जिससे प्रभावित सैनिकों की संख्या हजारों में है। लेकिन इस फैसले के बाद यह नीति फिलहाल लागू नहीं हो पाएगी, और ट्रांसजेंडर सैनिक अपनी सेवाएं जारी रख सकेंगे।
न्यायालय के इस फैसले पर नागरिक अधिकार संगठनों ने इसे स्वागत योग्य बताया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ ट्रांसजेंडर सैनिकों के लिए सुरक्षित भविष्य की गारंटी नहीं है बल्कि पूरे सामाजिक न्याय आंदोलन को मजबूती प्रदान करेगा। वहीं रक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करेंगे और इस मुद्दे पर अगले कदम पर गौर करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह न्यायिक निर्णय अमेरिकी समाज में लैंगिक पहचान के प्रति सहिष्णुता और स्वीकृति बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कोर्ट का यह संदेश साफ है कि किसी भी नीति का उद्देश्य राजनीतिक द्वेष या हानि पहुंचाना नहीं होना चाहिए।
ट्रांसजेंडर सैनिकों को लेकर यह मामला अमेरिका में लंबे समय से विवादित रहा है। पिछले कुछ वर्षों में देश की विभिन्न अदालतों और प्रशासनिक एजेंसियों ने इस संदर्भ में कई फैसले लिए हैं। वर्तमान निर्णय ट्रांसजेंडर सैनिकों के अधिकारों के संबंध में अमेरिकी न्याय प्रणाली की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
इस फैसले के बाद पेंटागन को अपनी नीति पुनः समीक्षा करनी होगी और संभव है कि आने वाले दिनों में ट्रांसजेंडर सैनिकों के मसले पर और भी कानूनी लड़ाइयां हों। ट्रांसजेंडर समुदाय और उनके समर्थक इस निर्णय को एक बड़ी जीत मान रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि यह स्थिति और स्थिरता की ओर बढ़ेगी।
