महिला निदेशक बोर्ड निदेशक पदों का केवल 18.4% ही हैं: CFA रिपोर्ट

नई दिल्ली, भारत – भारत में कॉर्पोरेट बोर्ड में महिला निदेशकों की भागीदारी को लेकर हाल ही में जारी की गई एक रिपोर्ट ने महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किए हैं। CFA (चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट) संस्थान द्वारा प्रकाशित इस रिपोर्ट में पाया गया है कि बोर्ड सदस्यता के कुल पदों में महिलाओं का हिस्सा मात्र 18.4 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में कॉर्पोरेट बोर्डों में लैंगिक असमानता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई बड़े उद्यम और वित्तीय संस्थान महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन अभी भी प्रवृत्ति धीमी है। महिलाओं की समिति में शामिल होने और बोर्ड में उच्च स्थान प्राप्त करने के लिए जरूरी समर्थन और अवसर उपलब्ध कराना प्राथमिकता बनना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक संगठित बोर्ड में विविधता होती है, तो निर्णय लेने की प्रक्रिया में व्यापक दृष्टिकोण शामिल होता है जो कंपनी के विकास और नवाचार में सहायक होता है। महिलाओं की भागीदारी न केवल सामाजिक न्याय का मामला है, बल्कि यह व्यापारिक सफलता की कुंजी भी हो सकती है।

दूसरी ओर, कानूनी प्रावधान और सरकारी नीतियां भी इस दिशा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हाल के वर्षों में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े नियमों में बदलाव करके महिलाओं को बोर्ड पदों पर न्यूनतम भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। इसके बावजूद, सांस्कृतिक और सामाजिक बाधाएं महिलाओं के लिए एक बड़ी Herausforderung बनी हुई हैं।

CFA की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कंपनियों को महिलाओं को बोर्ड में शामिल करने के लिए स्पष्ट नीतियां बनानी चाहिए, साथ ही उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण और मेंटरशिप प्रदान करनी चाहिए, जिससे वे नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें। इसके अलावा, समान अवसर प्रदान करने वाले माहौल का निर्माण करना आवश्यक है ताकि महिलाओं का दबाव और भेदभाव न झेलना पड़े।

अंत में, यह रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि महिला नेतृत्व को प्रोत्साहित करना केवल लैंगिक समानता की बात नहीं है, बल्कि यह आर्थिक समृद्धि और सतत विकास के लिए भी आवश्यक है। इंडस्ट्रीज, सरकार और समाज को मिलकर इस दिशा में सक्रिय रूप से काम करना होगा ताकि महिला निदेशक संख्या में बढ़ोतरी हो और उनके अनुभव से संपूर्ण कॉर्पोरेट जगत को लाभ हो।

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