सलीम राहत ने उर्दू शायरी को इलेक्ट्रॉनिक संगीत में नए अंदाज में प्रस्तुत किया

मुंबई, महाराष्ट्र – प्रसिद्ध शायर राहत इन्दौरी के पुत्र समीर राहत ने अपने नवीनतम संगीत एल्बम “रोज़-मर्रा” को हाल ही में लॉन्च किया है, जो जीवन की रोज़ाना की चुनौतियों और अनुभवों को संगीत के माध्यम से एक नई ऊर्जा प्रदान करता है। यह एल्बम समकालीन श्रोता वर्ग के बीच गहरी छाप छोड़ने के साथ-साथ पारंपरिक शायरी को आधुनिक आवाज़ में पेश करता है।

समीर राहत ने अपनी इस क्रिएटिव पहल के बारे में बताते हुए कहा कि “रोज़-मर्रा” सिर्फ एक संगीत एल्बम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी मानसिकता को दर्शाता है जो जीवन की आम समस्याओं को कला के जरिये समझने और स्वीकार करने की कोशिश करता है। उन्होंने अपने पिता की विरासत को सहेजते हुए उर्दू कविताओं को इलेक्ट्रॉनिक संगीत के साथ जोड़ा है, जिससे यह एक नया और अनूठा अनुभव बन गया है।

मीडिया से बात करते हुए समीर ने कहा, “मुझे हमेशा से अपनी संस्कृति और भाषा के प्रति गर्व रहा है। मेरी कोशिश यही रहती है कि शायरी के जरिए नई पीढ़ी को जोड़ा जाए और उन्हीं की भाषा में उनकी भावनाओं को अभिव्यक्त किया जाए।” एल्बम के ट्रैक्स में आज के समय की सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत परेशानियों को खूबसूरती से दर्शाया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, “रोज़-मर्रा” एक ऐसा संगीतमय प्रोजेक्ट है जो उर्दू शायरी को पारंपरिक सीमाओं से ऊपर उठाकर डिजिटल युग के अनुरूप ढालता है। इसके इलेक्ट्रॉनिक बीट्स और गाने की मधुर लय युवाओं को सहजता से अपनी ओर आकर्षित करती है। संगीत प्रेमी इसे शायरी और संगीत का एक बेहतरीन संगम मान रहे हैं।

समीर राहत के इस कदम को साहित्य और संगीत जगत में एक नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जो पारंपरिक कला को नए तकनीकी युग के साथ जोड़ता है। एल्बम की रिलीज के साथ ही कई संगीत समीक्षकों और फिल्म निर्माताओं ने इसकी तारीफ की है और इसे आने वाले समय में उर्दू संगीत में क्रांति माना जा रहा है।

“रोज़-मर्रा” एल्बम अब विभिन्न संगीत प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है, जहाँ से युवा कलाकार और श्रोता इसे सुन सकते हैं और अपनी ज़िन्दगी के अनुभवों से जोड़ सकते हैं। समीर राहत की यह पहल न केवल उनके पिता की विरासत को आगे बढ़ाती है, बल्कि भारतीय संगीत और शायरी की दुनिया में नई जान भी डालती है।

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