कारागार प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे: तृणमूल विधि मंत्री निर्मलकुमार

कोलकता, पश्चिम बंगाल

कई ऐसे दोषी बंदी हैं जो कानूनी अवधि समाप्त होने के बाद भी जमानत न मिलने के कारण जेल में ही कैद रहते हैं। इस गंभीर मुद्दे को ध्यान में रखते हुए, तृणमूल सरकार के विधि विभाग ने ऐसे कैदियों को न्यायिक सहायता प्रदान करने के विकल्प तलाशने का निर्णय लिया है। तृणमूल विधि मंत्री निर्मलकुमार ने हाल ही में एक संवाददाता सम्मेलन में इसे लेकर विस्तार से चर्चा की।

मंत्री निर्मलकुमार ने कहा कि ‘‘बीच-बीच में कई ऐसे हिरासत में लिए गए लोग हैं जिन्हें उचित कानूनी मदद नहीं मिल पाती है और वे समय-सीमा से अधिक समय तक जेल में रह जाते हैं। यह न्याय व्यवस्था के प्रति एक गंभीर चुनौती है। हमारी सरकार इस समस्या को दूर करने के लिए विभिन्न पहल कर रही है जिससे हर बंदी को उचित समय पर न्याय मिल सके।’’

उन्होंने यह भी बताया कि कैदियों के लिए कानूनी सहायता विस्तार की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। इस योजना के तहत न केवल आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों को मुफ्त कानूनी मदद मिलेगी, बल्कि जमानत से सम्बंधित मामलों को जल्दी निपटाने के लिए भी विशेष प्रावधान किए जाएंगे।

एक अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में भारत में कई स्थानों पर रिमांड कैदियों की संख्या अधिक है और न्यायिक प्रक्रिया धीमी होने से वे अनावश्यक रूप से जेल में लंबे समय तक कैद रहते हैं। इसी को देखते हुए विधि विभाग जेल प्रशासन को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधन मुहैया कराने पर भी विचार कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कानूनी सहायता बढ़ाने से जेल में बंद कैदियों की संख्या नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और न्यायपालिका की कार्यक्षमता में सुधार होगा। साथ ही, इससे मानवीय अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित होगी।

बड़े शहरों में न्यायिक प्रक्रियाओं को त्वरित करने के प्रयास के अंतर्गत विधि मंत्रालय ने तकनीकी संसाधनों में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया है। डिजिटल माध्यम से कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है जिससे प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बने।

इस प्रकार, तृणमूल विधि विभाग की यह पहल न्याय व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो जेल प्रशासन को आधुनिक बनाने के साथ-साथ न्याय की पहुँच सभी तक प्रदान करेगी।

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