पंजाब भाजपा ने नगर परिषद चुनाव में हिंसा के चलते स्थगन की मांग की

चंडीगढ़, पंजाब। पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने फिरोजपुर जिले के मुदकी नगर परिषद चुनाव को बड़े पैमाने पर फैली हिंसा और अन्य समस्याओं के कारण स्थगित करने की मांग की है। रविवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय सचिव सुनील दत्त भारद्वाज ने इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को एक शिकायत सौंपा, जिसमें आरोप लगाए गए हैं कि चुनाव प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आई हैं।

शिकायत में कहा गया है कि विपक्षी उम्मीदवारों खासकर भाजपा प्रत्याशियों के साथ धमकियों और हमलों का सिलसिला चल रहा है। आरोप हैं कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने अपनी भूमिका निभाने में अनदेखी की और कई मामलों में मुख्यमंत्री की पार्टी आम आदमी पार्टी के समर्थकों द्वारा नामांकन दाखिल करने में बाधा उत्पन्न करने जैसी गैरकानूनी गतिविधियों को अनदेखा किया।

भाजपा ने कहा कि 16 मई को गुरप्रीत सिंह सेखों के नेतृत्व में हथियारबंद समर्थकों ने नामांकन केंद्र के आसपास आतंक का माहौल पैदा किया था। इसके चलते कई प्रत्याशी और उनके समर्थक घायल हुए। इस घटनाक्रम में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हुई और स्थानीय पुलिस अधिकारी निष्क्रिय रहे। पुलिस ने पहली एफआईआर भी केवल जनता के भारी विरोध के बाद 17 मई को दर्ज की, जिसमें करीब 300 अज्ञात व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं।

पार्टी ने इस पूरे मसले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही भाजपा ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को तत्काल हटाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी अर्जी लगाई है। इसके अलावा, भाजपा ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि जब तक मुदकी में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने योग्य माहौल तैयार नहीं हो जाता, तब तक चुनाव स्थगित कर दिए जाएं।

भाजपा का कहना है कि लोकतंत्र तभी सफल हो सकता है जब चुनावी प्रक्रिया हर स्तर पर निष्पक्ष और सुरक्षित हो। भय और धमकी के माहौल में चुनाव करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। इसलिए सभी पक्षों को निष्पक्षता सुनिश्चित करने में योगदान देना चाहिए। पार्टी ने समर्थन उम्मीदवारों के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और नामांकन दाखिल करने से रोके गए प्रत्याशियों को उचित अवसर देने की भी मांग की है।

यह मामला पंजाब की राजनीतिक गहमागहमी को लेकर चिंताजनक संकेत है। चुनाव आयोग और संबंधित प्रशासन के लिए यह चुनौती है कि वे सभी पक्षों को बराबरी का मौका दें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुरक्षित बनाएं। मुदकी नगर परिषद चुनाव की स्थिति भविष्य में प्रदेश के चुनावी नज़ारों पर भी असर डाल सकती है।

स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि चुनाव को उचित सुरक्षा और निष्पक्षता के साथ नहीं कराया गया, तो इससे वोटरों के बीच भरोसा कम होगा और लोकतंत्र की मूल भावना तक प्रभावित हो सकती है। ऐसे में समय रहते उचित कदम उठाना बेहद आवश्यक है।

इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि चुनाव नियामक संस्थाओं और प्रशासन की भूमिका बेहद अहम है ताकि किसी भी स्तर पर राजनीतिक हिंसा और दलबदल की घटनाएं न हों एवं सभी पार्टियों के उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके। भाजपा की इस शिकायत पर प्रशासन की प्रतिक्रिया और चुनाव आयोग का कदम आगामी राजनीतिक माहौल के लिए अहम साबित होगा।

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