अंबाला। नीट पेपर लीक मामले को लेकर सियासत का माहौल गरमाया हुआ है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांगा है, लेकिन हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने इसके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। विज ने कहा है कि आजकल राजनीति में इस्तीफा मांगना बहुत आम बात हो गई है, जबकि असली मुद्दा काम करके दिखाने का होता है।
अनिल विज ने धर्मेंद्र प्रधान का बचाव करते हुए कहा कि वे सरकार के सबसे काबिल मंत्रियों में से एक हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही नीट पेपर लीक का मामला सामने आया, धर्मेंद्र प्रधान ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है और इस मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है ताकि कमियों को पहचाना जा सके।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए विज ने कहा कि खड़े होकर इस्तीफा मांग लेना आसान है, लेकिन जिम्मेदारी निभाना और ठोस कार्रवाई करनी ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि असली जवाबदेही केवल बयानों से नहीं, बल्कि जमीन पर किए गए काम से साबित होती है। इस मामले में सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है और जल्द ही परिणाम सामने आएंगे।
दरअसल, राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि साल 2024 में नीट पेपर लीक हुआ था, लेकिन मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया। सीबीआई जांच कर रही है और कमिटी बनी है। इसी प्रकार 2026 में भी यही मामला दोबारा हुआ, परीक्षा रद्द हुई लेकिन मंत्री ने फिर इस्तीफा नहीं दिया। राहुल गांधी ने पीएम मोदी से सवाल भी किए कि बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और बार-बार फेल हो रहे शिक्षा मंत्री को बर्खास्त क्यों नहीं किया जा रहा।
राहुल गांधी ने आगे लिखा कि मोदी सरकार में जिम्मेदारी नहीं होती बल्कि जालसाजी का फॉर्मूला चलता है। पहले लंबी खामोशी, फिर गुनहगारों को संरक्षण और आखिर में सवाल पूछने वालों पर हमले होते हैं। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में कोई मंत्री इस्तीफा नहीं देता और जो जवाबदेही लेनी चाहिए, सरकार उससे भाग रही है।
इस बीच अनिल विज का कहना है कि इस प्रकार के राजनीतिक आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश होती है जबकि सरकार कड़ी कार्रवाई कर रही है। धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में जांच तेजी से चल रही है और दोषियों को सजा मिल रही है। इस विवाद के बीच सरकार ने यह साफ कर दिया है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
नीट पेपर लीक के इस विवाद ने शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों की मांग को फिर से जोर दिया है। संसद में भी इस मामले पर चर्चा जारी है और सभी पक्षों से कहा गया है कि इस गंभीर मामले में राजनीति नहीं बल्कि धरातलीय कार्रवाई की जरूरत है।
