पंजाब सरकार को किसानों के लिए ईंधन पर स्टेट टैक्स कम करना चाहिए: भाजपा

चंडीगढ़, पंजाब – पंजाब सरकार पर भाजपा ने ईंधन पर लगने वाले राज्य कर को कम करने का दबाव बनाया है ताकि किसानों और आम जनता को महंगे ईंधन के बढ़ते बोझ से राहत मिल सके। भाजपा की राज्य इकाई ने शनिवार को साफ कहा कि केंद्र सरकार की तरह राज्य सरकार भी ईंधन की कीमतों में हो रहे तेजी से किसानों के आर्थिक बोझ को कम करने के लिए कदम उठाए।

भाजपा के राज्य महासचिव अनिल सरीन ने भाजपा के मीडिया प्रमुख विनीत जोशी की मौजूदगी में मीडिया से बात करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने मार्च 2022 में पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर के स्टेट टैक्स की कटौती लेकर बढ़ती कीमतों का भार खुद वहन किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को भी 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ी हुई कीमतों के कारण स्टेट टैक्स कम करना चाहिए, खासकर बुवाई और फसल के मौसम में किसानों की आर्थिक सहायता के लिए।

सरीन ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य अंतरराष्ट्रीय संकटों के कारण कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर बढ़ी हैं, लेकिन केंद्रीय सरकार ने पिछले चार वर्षों से तेल उत्पादों की कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास किया है। इसके विपरीत पंजाब की वर्तमान आम आदमी पार्टी सरकार ने मार्च 2022 के बाद में पेट्रोल और डीजल पर कर बढ़ाकर आम जनता पर लगभग 3 रुपए प्रति लीटर का अतिरिक्त बोझ डाला है।

उन्होंने विस्तार से बताया कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर से बढ़कर 120-130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है जिसके कारण अमेरिका, यूरोप, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में ईंधन के दामों में भारी वृद्धि देखी गई है। लेकिन भारत में मात्र 3 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई है जो कि केंद्र सरकार की सुव्यवस्थित नीति का परिणाम है।

भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से विनती की है कि वे केंद्र सरकार के उदाहरण को अपनाएं और राज्य करों को घटाकर किसानों व आम लोगों को महंगे ईंधन से राहत प्रदान करें। उन्होंने कहा, “इससे न केवल किसानों की खेती से जुड़ी लागत कम होगी बल्कि आम जनता को भी जीवनयापन में राहत मिलेगी।” भाजपा की मांग है कि राज्य सरकार जल्द से जल्द इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए।

पंजाब में खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए ईंधन पर कर में कटौती को अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि बढ़ते तेल भाव ने न केवल ट्रांसपोर्ट बल्कि खेती से जुड़े खर्चों को भारी बना दिया है। इस वक्त सरकार की भूमिका जरूरी हो जाती है ताकि किसानों और आम जनता को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

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