पंजाब सरकार को किसानों की मदद के लिए ईंधन पर राज्य कर कम करना चाहिए: भाजपा

चंडीगढ़, पंजाब। भाजपा की राज्य इकाई ने शनिवार को यह जोर दिया कि पंजाब के लोगों को ईंधन की बढ़ती कीमतों से राहत देने हेतु राज्य सरकार को ईंधन पर राज्य कर में कटौती करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 27 मार्च से पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर के दर से कर कम किया है, जिससे बढ़ती कीमतों का अधिकांश बोझ केंद्र सरकार ने खुद वहन किया है।

भाजपा महासचिव अनिल सरीन ने पार्टी के राज्य मीडिया प्रमुख विनीत जोशी की मौजूदगी में कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान भी इसी तरह पेट्रोल और डीजल पर 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ी हुई कीमत को राज्य कर कम करके किसानों और आम जनता पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करें। यह कदम खासकर बीजाई और बुवाई के इस महत्वपूर्ण मौसम में किसानों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सरीन ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बावजूद, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अप्रैल 2022 से लगभग चार वर्षों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की है, जिससे ईंधन मूल्य नियंत्रण में रहे हैं।

उनका आरोप था कि मार्च 2022 में जब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी, तब से उन्होंने पेट्रोल और डीजल पर सरकार की राज्य कर दरों में बढ़ोतरी की, जिससे आम उपभोक्ताओं पर लगभग 3 रुपए प्रति लीटर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

सरीन ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें तत्समय लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब लगभग 120-130 डॉलर प्रति बैरल हो चुकी हैं, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।

उन्होंने विश्वभर के उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका में ईंधन की कीमतें लगभग 50 प्रतिशत, यूरोप में 20 प्रतिशत, पाकिस्तान में 60 प्रतिशत और बांग्लादेश में 16 प्रतिशत तक बढ़ी हैं, वहीं भारत में यह वृद्धि केवल 3 प्रतिशत ही हुई है। यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार ने ईंधन कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए कड़े प्रयास किए हैं।

अंत में सरीन ने आग्रह किया कि पंजाब सरकार भी केंद्र सरकार के इसी दृष्टिकोण को अपनाते हुए राज्य चालान में कटौती करे और जिन 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि को लेकर आम जनमानस पर बोझ बढ़ा है, वह राज्य सरकार स्वयं वहन करे ताकि पंजाब के किसान, वाहन चालक तथा आम जनता आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सकें।

भाजपा की यह अपील पंजाब की मौजूदा राजनीतिक और आर्थिक परिस्थिति में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, खासकर तब जब ईंधन की कीमतें सीधे तौर पर कृषि लागत और परिवहन व्यय को प्रभावित करती हैं।

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