विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश। राज्यसभा सांसद मास्थान राव यादव ने आंध्र प्रदेश में बकिंघम नहर के साथ एक लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने इस योजना के तहत कृष्णापत्तनम और रामयापट्टनम बंदरगाहों के बीच एक पायलट परियोजना की सिफारिश की है, जिससे क्षेत्र में व्यापार और आवागमन को बढ़ावा मिलेगा।
मास्थान राव यादव का कहना है कि इस लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर से न केवल माल के परिवहन में सुविधा होगी, बल्कि यह आंतरिक सड़क यातायात पर भी दबाव कम करेगा। उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि बकिंघम नहर का व्यापक और प्रभावी उपयोग आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने सांसद से नेशनल वाटरवे-4 के अंतर्गत आईडब्ल्यूएआई की हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण रिपोर्ट का इंतजार करने को कहा है। यह सर्वेक्षण इस जल मार्ग की स्थिति और उसके किन किन मेहनतों में सुधार की संभावना पर रोशनी डालेगा।
सरबानंद सोनोवाल की ओर से कहा गया है कि जलमार्ग विकास को देखते हुए अधिक सावधानीपूर्वक योजना बनाना आवश्यक है ताकि संसाधनों का सही ढंग से उपयोग हो सके और परियोजना सफल हो। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार आंतरिक जलमार्गों को सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है, किन्तु इसके लिए ठोस और विश्वसनीय डेटा की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय जलमार्ग-4 के अंतर्गत इस प्रकार के सुरक्षात्मक और तकनीकी सर्वेक्षण से जल मार्गों की उपयोगिता बेहतर ढंग से समझी जा सकती है, जो भविष्य में लॉजिस्टिक्स को अधिक प्रभावी बनाएंगे। बकिंघम नहर, जो कि विभिन्न जिलों से होकर गुजरती है, अपनी व्यापक पहुंच के कारण व्यापार को बढ़ावा देने की एक समृद्ध संभावना लिए हुए है।
इस परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होने की उम्मीद है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां ग्रामीण और शहरी बाजारों के बीच माल परिवहन एक चुनौती रहा है। सीधा जल मार्ग होने से परिवहन की लागत में कमी आएगी और इससे व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं दोनों को फायदा होगा।
राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से लगातार आंतरिक जलमार्गों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। मास्थान राव यादव का यह प्रस्ताव एक ऐसे कदम के रूप में देखा जा रहा है जो आंध्र प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य को नए आयाम प्रदान कर सकता है।
जैसे ही आईडब्ल्यूएआई के सर्वेक्षण के परिणाम उपलब्ध होंगे, इस परियोजना पर और अधिक स्पष्टता आएगी और उसके अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। तब तक सांसद सहित सभी हितधारक इस प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
