चेन्नई, तमिलनाडु: डीएमके के विधायक परियाकरुप्पन ने मद्रास उच्च न्यायालय का सहारा लिया है ताकि टीवीके के विधायक सीनिवास सेतुपति को आगामी विश्वास मत में भाग लेने से रोका जा सके। इस मामले में अदालत की विशेष सुनवाई 10 मई को न्यायमूर्तियों एल. विक्टोरिया गौरी और एन. सेनथिलकुमार की अध्यक्षता में होगी।
इस मुद्दे की उत्पत्ति तब हुई जब हाल ही में हुए विश्वास मत में टीवीके के विधायक सीनिवास सेतुपति ने मंत्री के खिलाफ मात्र एक वोट के अंतर से जीत हासिल की। यह परिणाम राजनीतिक दलों के बीच तनाव और विवादों को और बढ़ा गया है। परियाकरुप्पन का दावा है कि सीनिवास सेतुपति को विश्वास मत में भाग लेने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, इसलिए उन्होंने न्यायालय से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
मद्रास उच्च न्यायालय में दर्ज इस याचिका में परियाकरुप्पन ने विभिन्न कानूनी आधार प्रस्तुत किए हैं, जिससे यह साबित करने का प्रयास किया गया है कि सीनिवास सेतुपति की सदस्यता संदिग्ध है और वह ऐसे महत्वपूर्ण मतदान में हिस्सा नहीं ले सकता। न्यायालय के इस मामले में निर्णय से आगामी विधानसभा के राजनीतिक समीकरण भी प्रभावित होंगे।
विशेष सुनवाई में दोनों पक्षों को पूरा मौका मिलेगा कि वे अपने तर्क प्रस्तुत करें। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला तमिलनाडु की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है क्योंकि इससे अन्य विधायकों के अधिकार और उनकी सदस्यता की वैधता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
डीएमके पार्टी ने अपने विधायकों के साथ इस मामले में एकजुटता दिखाते हुए कहा है कि वे न्यायालय के निर्णय का सम्मान करेंगे, लेकिन लोकतंत्र और प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करेंगे। वहीं, टीवीके ने इस याचिका को राजनीति से प्रेरित करार देते हुए दावा किया है कि उनके विधायक का मत देने का अधिकार संवैधानिक और विधिक तौर पर पूरी तरह वैध है।
इस विवाद के बीच विधानसभा की आगामी बैठकें और राजनीतिक घटनाक्रम लोगों की निगाहों का केंद्र बनी हुई हैं। आशा की जा रही है कि न्यायालय का फैसला भविष्य की कार्यवाही के लिए एक स्पष्ट दिशा देगा, जिससे तमिलनाडु की राजनीति में स्थिरता बनी रहे।
