चंडीगढ़, पंजाब। पंजाब की राजनीति इन दिनों विवादों और आरोप-प्रत्यारोप के कारण गरमाई हुई है। भारतीय जनता पार्टी के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सुनील जाखड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान जब राष्ट्रपति भवन जाएंगे, तो उन्हें राष्ट्रपति के पद की गरिमा का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि वे न तो अपने पद और न ही पंजाब विधानसभा की गरिमा को बनाए रखने में सक्षम रहे हैं।
पिछले दिनों शिरोमणि अकाली दल ने भी भगवंत मान पर गंभीर आरोप लगाए थे। अकाली दल ने मजदूर दिवस के मौके पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि मुख्यमंत्री नशे की हालत में विधानसभा सत्र में पहुंचे थे। इस विषय को सदन की गरिमा के लिए अपमानजनक बताते हुए अकाली दल ने कड़ी आलोचना की और मांग की कि मुख्यमंत्री का डोप टेस्ट कराया जाए ताकि स्पष्टता आए।
अकाली दल के अनुसार, ‘‘मुख्यमंत्राी के सदन में इस व्यवहार को देखकर यह साफ है कि वे विधानसभा की मर्यादा को ठेंगा दिखा रहे हैं।’’ दल ने कहा कि किसी भी स्थिति में शराब पीकर विधानसभा में आना सही नहीं है और इस कदम की सख्त निंदा की जानी चाहिए।
विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। पंजाब कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा ने भी मुख्यमंत्री पर घर में शराब पीकर सदन में आने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा, ‘‘यदि ये आरोप सत्य साबित होते हैं तो यह विधानसभा के नियमों का गंभीर उल्लंघन होगा। उम्मीद है कि विधानसभा अध्यक्ष इस पर उचित कार्रवाई करेंगे और डोप टेस्ट का आदेश देंगे।’’
इस बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करने के लिए मंगलवार को दिल्ली जा रहे हैं। इस दौरान वे आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में जाने के मामले को राष्ट्रपति के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने इस दलबदल को अवैध और गैरकानूनी बताया है।
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘‘हम सात सांसदों द्वारा किए गए अवैध और गैरकानूनी दलबदल का मुद्दा राष्ट्रपति के सामने रखेंगे। यह पंजाब के लोगों के जनादेश का सीधा अपमान है और ऐसे लोग किसी भी सहानुभूति के पात्र नहीं हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि इन सांसदों ने पंजाब और पार्टी के विश्वासघात किया है।
जानकारी के अनुसार, राज्यसभा के ये सात सांसद – राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, विक्रम साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता ने अप्रैल महीने में आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा की शरण ली थी। इससे आम आदमी पार्टी की राज्यसभा संख्या 10 से घटकर तीन रह गई है, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
यह राजनीतिक घटनाक्रम पंजाब की राजनीति में नये विवादों और नीति निर्धारण में बदलाव की संभावनाओं को जन्म दे रहा है, जिसका असर आगामी विधानसभा सत्र और आगामी चुनावों पर भी नजर आ सकता है।
