चंडीगढ़, पंजाब। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित तौर पर शराब पीकर विधानसभा में शामिल होने की घटना ने राजनीतिक रंगत को बढ़ा दिया है। इस मामले को लेकर रविवार को पंजाब भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की और मुख्यमंत्री को सख्त चेतावनी देने की मांग की। भाजपा नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री को या तो शराब छोड़नी होगी या फिर उनका पद खाली कर देना चाहिए।
पंजाब भाजपा के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “रविवार को भारतीय जनता पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्यपाल से मुलाकात की और उनसे मांग की कि वे मुख्यमंत्री भगवंत मान जी को बुलाकर उन्हें कहें कि या तो दारू छोड़ें नहीं तो कुर्सी छोड़ें।” इस बयान से राजनीतिक हलकों में बवाल मच गया है।
भाजपा के नेताओं ने राज्यपाल को एक लिखित ज्ञापन भी सौंपा है जिसमें मुख्यमंत्री के आचरण पर गंभीर आपत्तियां जताई गई हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि मुख्यमंत्री का नशे की हालत में विधानसभा में भाग लेना संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन है और यह पंजाब की सुरक्षा व शासन व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
ज्ञापन में लिखा गया है कि “पंजाब एक सीमावर्ती और संवेदनशील राज्य है, जहां कड़ी सुरक्षा व सतर्कता की जरूरत होती है। ऐसे राज्य का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति अनुशासन और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान के व्यवहार से जनता में यह धारणा बन रही है कि वे शासन के अहम समय पर नशे में रहते हैं, जो उनके संवैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन को प्रभावित करता है।”
भाजपा ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे इस मामले में उचित कार्रवाई करें और यदि आवश्यक हो तो मुख्यमंत्री को पद से हटाने की सिफारिश भी करें ताकि संविधान की अखंडता और जनता का विश्वास बना रहे। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस विवाद से पंजाब की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है तथा आगामी चुनावों पर भी इसका असर पड़ेगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीतिक उथल-पुथल को और बढ़ा दिया है। विपक्षी दलों द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं और उनकी साख को चुनौती दी जा रही है। वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन आरोपों को नकारते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है।
पंजाब में सत्ता और विपक्ष के बीच यह विवाद अब आगे किस मोड़ पर जाता है, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी। फिलहाल भाजपा का ये नया दबाव मुख्यमंत्री के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
