कोयम्बटूर, तमिलनाडु। तमिलनाडु सरकार ने नीलगिरि क्षेत्र में लगी जंगल की आग को पूरी तरह से नियंत्रित करने की घोषणा की है। इस अभियान में दमकल विभाग, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर काम किया। अब इलाके में आग पूरी तरह बुझा दी गई है और वन्यजीव सुरक्षित हैं।
शहर के मुख्य वन अधिकारी डॉ. राजेंद्र ने बताया कि आग सबसे पहले 3 अप्रैल की सुबह लगी थी, जो तेज़ हवा के कारण तेजी से फैल गई। बचाव दल ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए 48 घंटे में आग को नियंत्रित करने में सफलता पाई। इस दौरान चार हजार से अधिक एप्पल और ईंधन को पूरी मेहनत से बचाया गया।
आग से प्रभावित क्षेत्र का व्यापक निरीक्षण किया गया, जिससे प्रभावित वनस्पति और वन्यजीवों की स्थिति का आकलन किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि कई दुर्लभ पक्षी और जानवर स्थानांतरित किए गए, जिससे बड़ी जनहानि नहीं हुई।
तमिलनाडु की वन मंत्री मीनाक्षी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारी टीम ने समय रहते आग पर नियंत्रण पाया है। हमने आगे आग लगने से बचाव के लिए भी कई कदम उठाए हैं।” उन्होंने स्थानीय निवासियों का सहयोग भी सराहा, जिन्होंने स्वयंसेवी कार्य में भाग लिया।
वन विभाग ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट से पता चला है कि पॉलीथीन का जलना एवं यात्रियों की लापरवाही मुख्य वजहें हो सकती हैं। विभाग ने आग लगने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए ड्रोन तकनीक और निगरानी कक्ष स्थापित किए हैं।
स्थानीय प्रशासन ने आग से प्रभावित किसानों एवं ग्रामीणों को जल्द आर्थिक मदद देने का वादा किया है। वन क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिए वृक्षरोपण अभियान शुरू किया जाएगा, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से सुदृढ़ किया जा सके।
इस घटना से यह स्पष्ट हुआ है कि जंगलों की सुरक्षा और जागरूकता कितनी अहम है। तमिलनाडु सरकार ने वनों की सुरक्षा के लिए आगामी वक्त में और अधिक सख्ती और तकनीकी सहायता उपयोग करने की योजना बनाई है।
नीलगिरि में लगी इस आग ने कई लोगों के दिल दहला दिए थे, लेकिन संगठित प्रयासों से इसकी रोकथाम संभव हो सकी। अधिकारियों का कहना है कि जनता का सहयोग और सतर्कता ही भविष्य में ऐसे हादसों को रोक सकती है। हालाँकि, आग लगने के कारणों की सटीक पहचान के बाद ही पूरी स्थितियों को समझा जा सकेगा।
