नई दिल्ली, भारत – देश की सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने हाल ही में एक अहम बयान में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का साइबरसुरक्षा पर प्रभाव “बहुत ही वास्तविक खतरा” बन चुका है। उन्होंने विशेष रूप से एन्थ्रोपिक द्वारा जारी Mythos को इस संदर्भ में एक चिंता जनक मुद्दा बताया।
मेइटी सचिव ने बताया कि Mythos ने एआई की संभावित खामियों को उजागर किया है, जो साइबर हमलों और डेटा सुरक्षा की चुनौतियों को गंभीर रूप से बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीकें जहां नई संभावनाएं प्रदान करती हैं, वहीं उनके गलत उपयोग से साइबर अपराधों में इजाफा हो सकता है, जो न केवल व्यक्तिगत बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।
एस. कृष्णन ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार इस विषय पर एन्थ्रोपिक के साथ संवाद कर रही है ताकि Mythos और इसके इफेक्ट्स को लेकर अपनी चिंताओं को साझा किया जा सके और आवश्यक नियंत्रण एवं सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार डिजिटल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा मानकों को और अधिक कड़ा किया जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि एआई और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में Mythos जैसी तकनीकों के कारण सुरक्षा जोखिम बढ़ गए हैं, इसलिए सरकार का जिम्मा बनता है कि वह त्वरित और प्रभावी क़दम उठाए। डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की मजबूती के लिए निरंतर निगरानी, डाटा प्रोटेक्शन, और साइबर अपराधों के खिलाफ कड़े नियम आवश्यक हैं।
इस बीच, विशेषज्ञों का सुझाव है कि Mythos जैसी नई तकनीकों से जुड़ी चुनौतियों को समझते हुए, डिजिटल इंडिया के उद्देश्य को ध्यान में रखकर स्मार्ट नीतियां बनानी होंगी। इससे तकनीकी प्रगति के साथ-साथ देश की साइबर सुरक्षा भी सुदृढ़ बनी रह सकेगी।
सरकार के साथ-साथ उद्योग जगत, सुरक्षा एजेंसियां और तकनीकी समुदाय को मिलकर इस संकट से निपटने के लिए सहयोग करना होगा ताकि हम एक सुरक्षित डिजिटल भविष्य सुनिश्चित कर सकें।
