चंडीगढ़, पंजाब। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने रविवार को पंजाब पुलिस की कड़ी आलोचना की है, क्योंकि उन्होंने आम आदमी पार्टी से जुड़े राजनीतिक गुंडों द्वारा सांसदों के आवासों पर कथित हमलों के समय सुरक्षा प्रदान करने में नाकामी बरती। यह आरोप राज्य के पुलिस प्रमुख के खिलाफ लगाए गए हैं, जिन पर संवैधानिक पदों पर आसीन प्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल रहने का आरोप है।
तरुण चुघ ने कहा कि यदि पंजाब पुलिस इस प्रकार की सुरक्षा दे पाने में सक्षम नहीं है, तो अब केंद्रीय सुरक्षा बलों को परिचालित कर जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। उन्होंने कहा, “राज्य में आम आदमी पार्टी का शासन पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, जहां उसके भ्रष्ट और अनैतिक आचरण के कारण अनेक प्रमुख नेता पार्टी छोड़ चुके हैं।”
चुघ ने कहा कि हाल के घटनाक्रम स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि आम आदमी पार्टी पंजाब के हित में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में विफल साबित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में आप के शासन के दौरान माफिया और गैंगस्टर सक्रिय होकर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। राष्ट्रविरोधी तत्व इसके तहत छोटे-छोटे राजनीतिक झगड़ों के बीच बढ़-चढ़कर अपनी मनमानी कर रहे हैं।
इसी संदर्भ में, पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सरकार पर पुराने बोरे खरीद में घोटाले की आशंका जताई है। जाखड़ ने केंद्रीय खाद्य आपूर्ति मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र लिखकर तुरंत जांच की मांग की है। उन्होंने बताया कि सरकार ने विकेंद्रीकृत खरीद योजना के तहत हजारों पुराने बोरे गेहूं भरने के लिए खरीदे हैं, जो बाजार में 22 रुपये प्रति बोरा उपलब्ध हैं, जबकि पंजाब सरकार ने इन्हें 43.89 रुपये प्रति बोरा के भाव से खरीदा है।
जाखड़ ने कहा, “यह स्पष्ट रूप से एक घोटाले की आशंका पैदा करता है तथा भ्रष्टाचार की गहन जांच की आवश्यकता है।” उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की खरीद बिक्री प्रक्रिया में कमीशन की संभावना दूर नहीं है, जिससे पूरे खाद्य सुरक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लग सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। भाजपा के नेताओं द्वारा उठाए गए ऐसे आरोपों ने सरकार की कार्यप्रणाली और संगठनात्मक सक्षमता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
यह मामला पंजाब की कानून व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता के प्रति आम जनता में चिंता बढ़ा रहा है। राज्य की पुलिस और प्रशासनिक महकमे को नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व पारदर्शी कदम उठाने की आवश्यकता इस प्रकार पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।
