रूसी हैकर्स ने Signal ऐप का इस्तेमाल कर किया ठगी, जर्मन अधिकारियों का दावा

नयी दिल्ली, भारत – लगातार बढ़ते साइबर हमलों के मद्देनजर जर्मन अधिकारियों ने चेतावनी जारी की है कि रूस-समर्थित हैकर्स और जासूसी एजेंट Signal, Telegram और WhatsApp जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर ऑपरेशंस को अंजाम दे रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म अपनी गोपनीयता और सुरक्षित कम्युनिकेशन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन रूस से जुड़े साइबर अपराधी इसका दुरुपयोग कर रहे हैं।

जर्मनी के सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ये हैकर्स मासिक आधार पर विभिन्न प्रकार के साइबर हमले करते हैं, जिनमें फिशिंग, मैलवेयर फैलाना, और गलत सूचनाओं के जरिए लोगों को धोखा देना शामिल है। Signal ऐप के माध्यम से किए जाने वाले ऑपरेशंस में ये अपराधी अपने लक्ष्यों को गुमराह करने के लिए उत्तेजक और भ्रामक संदेश भेजते हैं। यह न केवल निजता के अधिकारों के लिए खतरा है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी इसे गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

एक वरिष्ठ जर्मन अधिकारी ने बताया कि “Russia-linked hackers ने सिग्नल और अन्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्स का इस्तेमाल करके एजेंट ट्रैप्स और दुर्भावनापूर्ण अभियानों को अंजाम देना शुरू कर दिया है। हमारी टीम निरंतर इस पर निगरानी रखे हुए है और साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।”

विश्लेषकों का मानना है कि इस खतरे के बढ़ने के पीछे रूस की साइबर रणनीति है, जिसका मकसद पश्चिमी देशों में अविश्वास फैलाना और उनके इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाना है। Signal, Telegram और WhatsApp जैसी सेवाएं जब एन्क्रिप्टेड होती हैं तो इनमें उपयोगकर्ताओं की बातचीत निजी रह जाती है, परंतु इसके बावजूद यदि क्रिमिनल समूह इनका दुरुपयोग कर रहे हैं तो समस्या गम्भीर हो जाती है।

जर्मन साइबर सुरक्षा एजेंसियां और विभिन्न तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर इस खतरे की पहचान कर इसे रोकने के उपाय ढूंढ रहे हैं। उन्होंने आम जनता को सतर्क रहने और किसी भी अनजान स्रोत या संदिग्ध संदेश से बचने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सुरक्षा में सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है।

इसके अलावा, जर्मन सरकार ने यह भी बताया कि सार्वजनिक वार्तालापों में इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा मानकों को कड़ा करने की दिशा में कार्य जारी है, ताकि भविष्य में इस तरह के दुरुपयोग को रोकना आसान हो सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य उपयोगकर्ताओं को चाहिए कि वे अपने स्मार्टफोन और एप्लिकेशन्स के सिक्योरिटी अपडेट समय-समय पर करते रहें और संदिग्ध लिंक्स या अज्ञात स्रोतों से भेजे गए संदेशों पर ध्यान न दें। साथ ही, साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और जन-संपर्क अभियान भी आवश्यक है।

रूस-समर्थित साइबर हमलों के बीच सुरक्षा एजेंसियां चौकस हैं और निरंतर रणनीतियां बना रही हैं ताकि डिजिटल दुनिया में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। Signal, Telegram और WhatsApp जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म की सुरक्षा में सुधार तथा उनकी विश्वसनीयता बनाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती है।

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