बलवीर सिंह सीचेवाल कौन हैं जिन्होंने केजरीवाल का साथ नहीं छोड़ा, ‘आजाद समूह’ में शामिल होने का न्योता मिला था

चंडीगढ़/नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के अंदर चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें ‘‘आजाद समूह’’ में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। साथ ही, उन्होंने भाजपा में शामिल हुए पार्टी के कुछ सांसदों पर तीखा प्रहार किया और इसे ‘‘विश्वासघात’’ बताया।

आजाद समूह क्या था?

सीचेवाल के अनुसार, शुक्रवार सुबह उन्हें राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी की ओर से फोन आया, जिसमें उन्हें पंजाब से संबंधित मामलों पर मजबूत आवाज उठाने के लिए ‘‘आजाद समूह’’ में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया। साहनी ने बताया कि इस समूह में छह से सात राज्यसभा सदस्य पहले ही हैं और उनके हस्ताक्षर भी जुटा लिए गए हैं। लेकिन सीचेवाल ने साफ माना कि उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता

बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि उनका रुख हमेशा से साफ रहा है और वह पार्टी और जनता के प्रति जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की एकता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और वह किसी भी ऐसी पहल का हिस्सा नहीं बनेंगे जो पार्टी को कमजोर करे। राजनीतिक स्थिरता के लिए यह बहुत जरूरी है कि संगठन में एकता बनी रहे।

भाजपा में शामिल सांसदों पर कड़ी प्रतिक्रिया

सीचेवाल ने उन पार्टी सदस्यों की आलोचना की जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा। उन्होंने इसे न केवल राजनीतिक निर्णय बल्कि विश्वासघात के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि AAP ने पंजाब के मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें चुना था, लेकिन उन्होंने यह जिम्मेदारी छोड़ दी और भाजपा की ओर चले गए।

राघव चड्ढा और संदीप पाठक के फैसलों पर सवाल

सीचेवाल ने विशेष रूप से राघव चड्ढा और संदीप पाठक की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इन नेताओं को पंजाब में काम करने के लिए पूरा समर्थन दिया था, फिर भी उनका पार्टी छोड़ना संगठन के लिए चिंता का विषय है। यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत स्वार्थ संगठन के हितों से ऊपर रखे गए।

रिप्रेजेन्टेशन के अवसरों की कमी

सीचेवाल ने यह भी कहा कि उन्हें राज्यसभा में अपनी बात कहने के पर्याप्त मौके नहीं मिले। अधिकांश समय केवल राघव चड्ढा और संदीप पाठक ही चर्चा में सक्रिय थे। उन्हें केवल शून्यकाल या विशेष अवसरों पर ही बोलने का मौका मिला। इससे पार्टी के अंदर नेतृत्व के तरीकों पर भी सवाल उठते हैं।

सियासी हलचल तेज

AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 के इस्तीफे और भाजपा में शामिल होने के बाद से राजनीतिक माहौल गर्मा चुका है। अब बलबीर सिंह सीचेवाल के बयान ने इस विवाद को और भी जटिल कर दिया है, जो पार्टी के अंदर लंबे समय से चल रहे असंतोष को उजागर करता है।

पंजाब की राजनीति पर प्रभाव

इस विवाद से पंजाब की राजनीति में बड़ा असर देखने को मिल सकता है। AAP के भीतर यह आंतरिक संघर्ष विपक्ष को मजबूती देने वाला मुद्दा बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह राजनीतिक जंग और तीव्र हो सकती है और इसके दूरगामी परिणाम भी सामने आएंगे।

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