चंडीगढ़, पंजाब। आम आदमी पार्टी (आप) के कई सांसदों द्वारा भाजपा में शामिल होने के मामले में पंजाब के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने शुक्रवार को कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में आप के भीतर चल रही फूट ने पार्टी के वास्तविक चेहरे को पूरी तरह उजागर कर दिया है। बाजवा ने इसे वैचारिक संघर्ष नहीं, बल्कि शक्ति और संसाधनों की लड़ाई बताया।
प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि यह विवाद पंजाब के संसाधनों और जनता के पैसे को नियंत्रित करने की होड़ है, जिसका असर जनता पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की राजनीति शासन प्रशासन के बजाय राज्य के खजाने तक पहुंचने की आंतरिक प्रतिस्पर्धा से प्रेरित रही है।
कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि वर्तमान घटनाक्रम सिद्धांतों की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि सत्ता, संरक्षण और पैसे के लिए संघर्ष है। बाजवा ने राघव चड्ढा के उस बयान पर भी सवाल उठाए जिसमें उन्होंने कहा था कि वे पार्टी की गलत हरकतों में शामिल नहीं रह सकते थे। वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि चड्ढा और अन्य इसलिए पार्टी छोड़ गए क्योंकि उन्हें भ्रष्टाचार करने की अनुमति नहीं मिली।
बाजवा ने कहा, “जब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाएंगे तो सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी। यह लड़ाई कभी भी विचारधारा की नहीं थी, बल्कि राज्य के सरकारी खजाने की लूट को लेकर थी।”
उन्होंने भाजपा की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए और इसे “जनता के जनादेश की सौदेबाजी” बताया। बाजवा ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का उपयोग कथित अवैध संपत्ति की जांच के नाम पर किया गया, लेकिन वास्तव में इसका इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने और लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए किया गया।
बाजवा ने कहा कि इस तरह के दुरुपयोग से कानून के शासन पर सवाल उठते हैं। उन्होंने भारत की जनता से अपील की कि वह जवाबदेही की उम्मीद रखती है, न कि राजनीतिक सौदेबाजी।
प्रताप सिंह बाजवा ने कांग्रेस के लोकतांत्रिक मूल्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही को बनाए रखने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि जब 2027 में पंजाब की जनता कांग्रेस को सत्ता सौंपेगी, तब पार्टी सभी विवादों की निष्पक्ष जांच कराएगी और दोषियों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराएगी।
बाजवा ने कहा, “कांग्रेस स्वच्छ शासन और जनता के जनादेश के सम्मान के लिए पूरी मजबूती से खड़ी है। पंजाब को स्थिर, ईमानदार और ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो राजनीतिक अवसरवादिता से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता दे।”
