‘टू वुमेन’ मूवी समीक्षा: कनाडाई कॉमेडी अपने पुराने दौर में अटकी हुई

Toronto, Ontario – फ्रेंच-कनाडाई निर्देशिका क्लोए रोबिचौड की फिल्म ‘टू वुमेन’ एक ऐसी कॉमेडी है जो हास्यपूर्ण बनने के कई अवसरों के बीच कहीं फंसी नजर आती है। इस फिल्म की कहानी और सेटअप एक पुराने और अब अप्रचलित ट्रॉप पर आधारित है, जिस वजह से यह ताजा और आधुनिक कॉमेडी के रूप में दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाती।

फिल्म का कथानक दो महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमता है, जिनके बीच की दोस्ती और उनकी व्यक्तिगत जिंदगियां दर्शाई गई हैं। हालांकि, यह विषय स्वाभाविक रूप से दिलचस्प हो सकता है, लेकिन फिल्म का प्रस्तुतीकरण और कहानी कहने का अंदाज इसे पुराने जमाने की कॉमेडी की तरह महसूस कराता है। दर्शकों को कई जगह ऐसा लग सकता है कि फिल्म पुराने सांचे में बनी हुई है और इसमें नई बात या कोई खास नवीनता नहीं है।

निर्देशिका क्लोए रोबिचौड ने कुछ अच्छे दृश्यों और पात्रों को प्रस्तुत करने की कोशिश की है, परंतु पटकथा और संवादों में वह चुटकुले या हास्य के तत्व उतनी ताजगी नहीं ला पाते जितनी की आज के दर्शकों की उम्मीद होती है। फिल्म की गति धीमी है और कई बार यह ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि यह एक पुराने जमाने की कॉमेडी को दोबारा पेश करने की कोशिश कर रही हो, जो आधुनिक समय के दर्शकों की अपेक्षाओं से मेल नहीं खाती।

इसके अलावा, कलाकारों की प्रस्तुति अच्छी है, खासकर मुख्य भूमिका निभाने वाली महिलाओं ने अपनी भूमिका में जान डालने की पूरी कोशिश की है। परन्तु कमजोर पटकथा के कारण उनकी कोशिशें सीमित प्रभाव ही छोड़ पाती हैं। दृश्यांकन और संगीत फिल्म के सामान्य स्वरूप के अनुरूप हैं, परंतु वे भी कुछ अलग या विशेष नहीं लगते।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ‘टू वुमेन’ एक ऐसा प्रयास है जो शायद पुरानी स्मृति और संकल्पनाओं में उलझा हुआ है। अगर फिल्म को पूरी तरह से सफल कॉमेडी माना जाए तो इसके लिए इसे वर्तमान दौर की नई सोच और पटकथा की आवश्यकता थी, जो इसमें नज़र नहीं आती। कनाडाई सिनेमा के संदर्भ में यह फिल्म एक औसत प्रयास के रूप में देखी जा सकती है, जो शायद सिर्फ उन दर्शकों के लिए उपयुक्त हो जो पुरानी कॉमेडी शैली के प्रशंसक हों।

इस फिल्म की समीक्षा से साफ समझ आता है कि मनोरंजन उद्योग में समय के साथ कहानी कहने के नए तरीके और सामाजिक सोच का महत्व बढ़ता जा रहा है। ‘टू वुमेन’ जैसी फिल्मों का उदाहरण यह दर्शाता है कि पुराने ट्रॉप्स पर ही निर्भर रहना आज के दौर में दर्शकों को बांध पाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

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