मंगलूरू, कर्नाटक: दक्षिण कन्नड़ जिले के विधायक व मंगोलूर सिटी नॉर्थ के प्रतिनिधि वाई. भरत शेठ्टी ने कर्नाटक विधानसभा में एक दिलचस्प मुद्दा उठाते हुए प्रियंक खर्गे से कलाबुरगी जिले की एसएसएलसी परीक्षा में अंतिम रैंक के विषय पर सवाल किया। शैक्षणिक सुधारों की आवश्यकता को लेकर विधायक भरत ने कहा कि प्रियंक खर्गे को दक्षिण कन्नड़ का आलोचनात्मक रूप से विश्लेषण करने के बजाय कलाबुरगी जिले की शिक्षा प्रणाली सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।
सभा में उन्होंने कहा कि “कलाबुरगी का शैक्षणिक प्रदर्शन चिंताजनक है, और इसके लिए हमें ठोस कदम उठाने की जरूरत है। यदि विधायक इसे सुधारने की कोशिश करेंगे तो बेहतर होगा बजाय कि सिर्फ दक्षिण कन्नड़ जैसी विकसित जगहों की आलोचना करें।”
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंक खर्गे ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता पूरे कर्नाटक में समान रूप से सुधार की मांग करती है। उन्होंने शिक्षक और सरकार दोनों पर जोर देते हुए कहा कि शैक्षणिक सुधार तभी संभव है जब समाज, सरकार व शैक्षिक संस्थान एक साथ मिलकर काम करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि कलाबुरगी जिले में शिक्षा के क्षेत्र में कई चुनौतियाँ हैं, जिनमें आधारभूत संरचना की कमी, प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, और बच्चों की स्कूल छोड़ने की दर शामिल हैं। इसके अलावा, ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में स्कूलों की पहुंच सीमित होने के कारण शिक्षा में समानता स्थापित करना मुश्किल हो रहा है।
वहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा सुधारों के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, जिनमें डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, और छात्र कल्याण कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि लक्ष्य है धीरे धीरे कलाबुरगी जैसे पिछड़े जिलों की स्थिति में सुधार लाना।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों में सुधार की बहुत आवश्यकता है। कई अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए शहरों की ओर भाग रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का स्तर और गिरता जा रहा है।
इस पूरे विवाद को देखते हुए, राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों ही वर्गों से आग्रह किया जा रहा है कि वे क्षेत्रीय भेदों को कम करने और सभी जिलों में समान शिक्षा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मिलकर कार्य करें। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार ही कर्नाटक जैसे विविध राज्य के विकास की कुंजी है।
