वैज्ञानिक सोच और तर्कसंगत दृष्टिकोण से जाति उन्मूलन संभव, मुख्यमंत्री सिद्धरमयाह

नई दिल्ली: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमयाह ने जाति और धर्म के नाम पर विभाजन फैलाने वाले ताकतों के प्रति सावधानी बरताने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि समाज में सौहार्द बनाए रखने और जाति व्यवस्था को खत्म करने के लिए वैज्ञानिक सोच और तर्कसंगत दृष्टिकोण का होना अनिवार्य है।

सीएम सिद्धरमयाह ने एक सार्वजनिक संबोधन में कहा कि हमारी सबसे बड़ी चुनौती वह है जो धर्म और जाति के बहाने लोगों के बीच असहमति और द्वेष पैदा करना चाहते हैं। इस स्थिति को रोकने के लिए हमें जागरूक होकर, अपने सोच को वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित करना होगा, ताकि समाज में समानता और सद्भावना कायम रहे।

उन्होंने आगे कहा कि जाति का नाम लेते हुए भेदभाव और हिंसा किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। ‘‘हमें जाति के झूठे खांचे तोड़कर एक साथ आना होगा। इसके लिए दिमाग में वैज्ञानिक सोच और समाज के प्रति संवेदनशीलता आवश्यक है।’’ सीएम ने कहा कि ऐसे लोग जो जाति और धर्म के नाम पर समाज में फूट डालना चाहते हैं, वे देश के विकास में बाधक हैं और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे।

सिद्धरमयाह ने बताया कि सरकारी योजनाओं और नीतियों का उद्देश्य सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करना है, ताकि जाति आधारित भेदभाव खत्म हो सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में सुधार लाना आवश्यक है जिससे पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाया जा सके।

उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे ऐसे नकारात्मक प्रवृत्तियों के खिलाफ आवाज उठाएं और अपनी सोच को वैज्ञानिक बनाएं। उन्होंने कहा कि यदि हम तर्कसंगत सोच अपनाएंगे, तो जाति-पाति और धार्मिक आधार पर होने वाली समस्या स्वतः समाप्त हो जाएगी।

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री सिद्धरमयाह का यह बयान समय की मांग है क्योंकि कई जगह पर सामाजिक सौहार्द को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। उनका विचार है कि वैज्ञानिक मनोवृत्ति और शिक्षित सोच ही समाज को सशक्त और एकजुट कर सकती है।

समाज में व्याप्त जातिगत तनाव और धार्मिक असहिष्णुता के कारण देश के विकास पर असर पड़ता है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री द्वारा दी गई यह चेतावनी और मार्गदर्शन महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो सामाजिक समरसता के लिए नया संदेश देता है।

अंत में, मुख्यमंत्री सिद्धरमयाह ने जनता से आग्रह किया कि वे अपने परिवारों और समाज में सद्भाव और एकजुटता बनाए रखें और जाति तथा धर्म के नाम पर विभाजन करने वालों को सफल न होने दें। केवल तभी हमारा देश प्रगतिशील और समृद्धि की ओर बढ़ सकेगा।

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