आंध्र प्रदेश के हिरामंडलम के सुरम्य पहाड़ों के बीच बसा कुर्मा ग्रामम एक छोटा सा गांव है, जो लगभग 60 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और यहाँ 17 परिवार निवास करते हैं। यह गांव आधुनिक जीवनशैली से पूरी तरह अलग है और यहाँ का जीवन रफ्तार से रहित, सरलता और आध्यात्मिक अनुशासन में डूबा हुआ है।
कुर्मा ग्रामम में बिजली, मोबाइल फोन, इंटरनेट कनेक्टिविटी और LPG जैसी सुविधाएं नहीं हैं। इस गांव के लोग प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहते हैं और पारंपरिक तौर-तरीकों से जीवन यापन करते हैं। यहां की सादगी और स्वावलंबन की जीवनशैली न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि आधुनिकता के शोर से दूर एक विशिष्ट शांति भी प्रदान करती है।
गांव की प्रमुख आर्थिक गतिविधि कृषि है, जहां किसान प्राकृतिक खेती करते हैं और रासायनिक पदार्थों का उपयोग नहीं करते। खेतों में वे खास तौर पर स्थानीय फसलों की खेती करते हैं जो इस क्षेत्र की जलवायु के अनुरूप होती हैं। इसके चलते फसलें टिकाऊ और पौष्टिक होती हैं। गरीब संसाधनों के बावजूद, ग्रामीणों की आपसी सहायता और सामुदायिक भावना उन्हें मजबूत बनाती है।
यहां की सांस्कृतिक परंपराएं भी आधुनिकता की भागदौड़ से अछूती हैं। त्योहार, धार्मिक अनुष्ठान और गांव के मेलों में लोग मिल-बाँट कर भागीदारी करते हैं। आध्यात्मिकता का प्रभाव यहां के जीवन में गहराई से देखा जा सकता है, जो न केवल उनके आचार-विचार में बल्कि उनकी दिनचर्या में भी दर्शाता है।
इस तरह का जीवनशैली आज के तेज़ी से बदलते दौर में एक उदाहरण प्रस्तुत करती है कि किस तरह सादगी, स्थिरता और प्रकृति के साथ मेलजोल से जीवन को समृद्ध बनाया जा सकता है। कुर्मा ग्रामम एक प्रेरणा है उन लोगों के लिए जो प्राकृतिक और स्थायी जीवन के मायने तलाश रहे हैं। हरिश गिलाई की रिपोर्ट में यह गांव एक जीवित आदर्श की तरह सामने आता है, जो हमें आधुनिकता की चकाचौंध से हटकर असली खुशहाली की समझ देता है।
