४० वर्ष की आयु के बाद कई लोगों को शरीर की प्राकृतिक गंध में बदलाव महसूस होने लगता है। नहाने, कपड़े बदलने और डियोडोरेंट लगाने के बावजूद शरीर से आने वाली गंध पहले से अलग, तेज या लंबे समय तक रह सकती है। यह बदलाव सिर्फ पसीने या साफ-सफाई की कमी से नहीं होता, बल्कि खुब सारे जैविक कारण इसके पीछे होते हैं।
शरीर की गंध और पसीना अलग हैं
अधिकांश ताजा पसीना गंधहीन होता है, लेकिन त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया जब इस पसीने और अन्य पदार्थों को तोड़ते हैं, तो शरीर से दुर्गंध निकलती है, जिसे बॉडी ओडर कहा जाता है। उम्र बढ़ने पर त्वचा की सतह के तेल, पसीने की स्थिति, माइक्रोबायोम और हार्मोनल बदलाव शरीर की गंध को प्रभावित कर सकते हैं। तनाव, भोजन, मौसम और कपड़ों का फैब्रिक भी इस बदलाव में भूमिका निभाते हैं। इसलिए, गंध बदलना जरूरी नहीं कि हाइजीन खराब हो गई हो। एनसीबीआई के एक अध्ययन से पता चलता है कि उम्र, हार्मोन, खानपान और पर्यावरण जैसे कई कारक गंध पर प्रभाव डालते हैं।
स्किन ऑयल और बैक्टीरिया गंध प्रभावित करते हैं
त्वचा के सेबेशियस ग्लैंड्स प्राकृतिक तेल सीबम बनाते हैं, जो त्वचा की सुरक्षा और नमी के लिए जरूरी हैं। इस तेल में लिपिड और फैटी एसिड होते हैं, जिनकी संरचना में उम्र के साथ बदलाव आते हैं। एक अध्ययन में ४० वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की त्वचा पर 2-Nonenal नामक यौगिक मिला, जो गंध बदलने का कारण बनता है।
त्वचा पर मौजूद प्राकृतिक बैक्टीरिया भी गंध में अहम भूमिका निभाते हैं। ये बैक्टीरिया पसीने से निकलने वाले गंधहीन पदार्थों को तोड़ कर तेज, खट्टी या सल्फर जैसी गंध उत्पन्न कर सकते हैं। शरीर के एक्राइन ग्लैंड्स अधिकतर पानी वाला पसीना बनाते हैं, जबकि एपोक्राइन ग्लैंड्स जैसे अंडरआर्म और जननांग के पास पाई जाती हैं, जिनके स्राव से गंध पैदा होती है।
महिलाओं में ४० वर्ष की उम्र के आसपास पेरिमेनोपॉज शुरू होता है, जो मेनोपॉज से पहले का चरण है। इस दौरान हार्मोनल उतार-चढ़ाव से हॉट फ्लैशेज और रात में अधिक पसीना आ सकता है। बढ़ा पसीना अंडरआर्म में नमी बढ़ाता है, जो बैक्टीरिया के लिए अनुकूल माहौल बनाता है और गंध को तेज कर सकता है।
हार्मोनल बदलाव सूंघने की क्षमता और खुद की प्राकृतिक गंध को महसूस करने के तरीके को भी बदल सकते हैं। इसलिए, मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को शरीर की गंध पहले से अधिक तीव्र लग सकती है, लेकिन यह हर महिला में नहीं होता। हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के अनुसार, नाइट स्वेट्स और हॉट फ्लैशेज से पसीना बढ़ना शरीर की गंध में बदलाव का कारण बन सकते हैं।
यदि अचानक बेहद ज्यादा पसीना आना, अनियमित पीरियड्स या कोई अन्य परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है। उम्र के साथ शरीर की गंध में बदलाव में त्वचा के तेलों का बदलाव, 2-Nonenal यौगिक, बैक्टीरिया और हार्मोनल परिवर्तन जैसे कई कारक शामिल होते हैं।
इस बदलाव को सामान्य समझना ही बेहतर है, क्योंकि हर व्यक्ति के लिए ये कारण अलग होते हैं और हर नए गंध को उम्र का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। नियमित साफ-सफाई, सूखा और आरामदायक कपड़े पहनना, और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सलाह लेना शरीर की गंध को नियंत्रित करने में मदद करता है।
