पंजाब के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर अमृतपाल सिंह बाठ को कनाडा पुलिस ने 8 अक्टूबर को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में एक सामान्य ट्रैफिक जांच के दौरान गिरफ्तार किया। पुलिस ने इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के तहत उन्हें दबोचा। अब पंजाब पुलिस अमृतपाल को भारत लाने की तैयारी कर रही है और उसके लिए दस्तावेजी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
ट्रैफिक जांच में खुला अमृतपाल का असली चेहरा
कनाडा के व्हाली इलाके में अमृतपाल एक गाड़ी में बैठे थे, जहां ड्राइवर नशे में होने की शक के कारण पुलिस ने उन्हें रोका। ड्राइवर के असंतुलित वाहन चलाने से पुलिस को संदेह हुआ। जब अमृतपाल ने अपनी आईडी दी, तो पुलिस को उसमें फर्जीवाड़ा नजर आया और जांच शुरू की गई।
आईडी की जांच के बाद ये पता चला कि अमृतपाल इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के तहत वांछित अपराधी था, जो पंजाब पुलिस की मांग पर गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मौके पर उसे हिरासत में ले लिया और आगे की जांच के लिए कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी को सुपुर्द किया।
अमृतपाल की गिरफ्तारी और आरोप
कनाडा पुलिस को पहले से यह जानकारी नहीं थी कि अमृतपाल उनके इलाके में मौजूद है। ड्राइवर के बारे में भी अभी स्पष्ट नहीं है कि वह उसका साथी था या अंजान व्यक्ति। यह गिरफ्तारी महज एक रूटीन ट्रैफिक चेक के दौरान हुई।
अमृतपाल पर पंजाब और अन्य राज्यों में कुल 20 से अधिक गंभीर आरोप दर्ज हैं। इनमें झबल के सरपंच मुनीश कुमार की हत्या, कारोबारियों से रंगदारी वसूलना, नशीले पदार्थों की तस्करी, और विदेश से अपने आपराधिक सिंडिकेट का संचालन शामिल है।
कनाडा बीएसए की जांच जारी है और अमृतपाल के खिलाफ विस्तृत रिकॉर्ड संकलित किया जा रहा है। पंजाब पुलिस ने उनके प्रत्यर्पण के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस सूत्र बताते हैं कि इस गिरफ्तारी ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग के महत्व को उजागर किया है, खासकर जब अपराधी विदेशों में छुप जाते हैं। अमृतपाल के गिरफ्तार होने से पंजाब पुलिस को काफी राहत मिली है।
यह गिरफ्तारी पूर्व में भारत सरकार द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस की सफलता भी है, और इससे अन्य अपराधियों के लिए भी सख्त संदेश जाएगा। इसे कानून व्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इस घटना का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह दर्शाता है कि साधारण ट्रैफिक जांच भी बड़ी सफलताओं का माध्यम बन सकती है। अब अमृतपाल बाठ को भारत लाने का कागजी काम पूरा किया जा रहा है ताकि उन पर न्यायालय में कार्यवाही हो सके।
