हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद में समुद्री सुरक्षा और वैज्ञानिक सहयोग पर मंथन करेगी भारतीय नौसेना, 18 देशों के विशेषज्ञ होंगे शामिल

नई दिल्ली, भारत।

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना तीन से पांच नवंबर तक नई दिल्ली में हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (आईपीआरडी) का आयोजन करेगी। इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक सम्मेलन में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के 18 देशों के समुद्री विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शिक्षाविद और नीति निर्माता हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा, महासागर प्रशासन, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी।

इस संवाद का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना और समुद्री क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशना है। सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे, ताकि क्षेत्रीय स्तर पर आपसी समझ, साझेदारी और सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

राजनाथ सिंह और जितेंद्र सिंह करेंगे संबोधित

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन के दूसरे दिन दो पेशेवर सत्रों के साथ दो मंत्रिस्तरीय सत्र आयोजित किए जाएंगे। पहले मंत्रिस्तरीय सत्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संबोधित करेंगे। वहीं, दूसरे सत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह विशेष संबोधन देंगे।

तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में अन्य विशिष्ट अतिथियों के संबोधन भी होंगे। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में समुद्री क्षेत्र से संबंधित मौजूदा चुनौतियों, वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

समुद्री विज्ञान और तकनीकी विकास पर रहेगा जोर

हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद में समुद्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, आपसी सहयोग से नई तकनीकों के विकास और वैज्ञानिक आंकड़ों तक उचित पहुंच सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

इसके अलावा, महासागरों के जिम्मेदार प्रबंधन और समुद्री संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा होंगे। सम्मेलन में यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि अलग-अलग देशों की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं का उपयोग साझा चुनौतियों से निपटने के लिए किस तरह किया जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली चुनौतियां भी महत्वपूर्ण विषय रहेंगी। ऐसे में वैज्ञानिक जानकारी का आदान-प्रदान और संस्थागत साझेदारी मजबूत करना क्षेत्रीय सहयोग के लिए अहम माना जा रहा है।

क्षेत्रीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आईपीआरडी में केवल विचार-विमर्श तक सीमित रहने के बजाय ऐसे ठोस उपायों की पहचान पर जोर दिया जाएगा, जिन्हें राष्ट्रीय, उप-क्षेत्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर लागू किया जा सके।

इसके तहत द्विपक्षीय, त्रिपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग तंत्रों के माध्यम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इन प्रयासों का उद्देश्य आपसी विश्वास बढ़ाना, साझा हितों को प्रोत्साहित करना और समुद्री क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए मिलकर काम करना है।

सम्मेलन में वैज्ञानिक संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों और नीति निर्धारकों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। इससे समुद्री अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और महासागर प्रशासन के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, तीन से पांच नवंबर तक आयोजित होने वाला यह संवाद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, वैज्ञानिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!