नई दिल्ली, दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों की गोपनीय जानकारी कथित तौर पर हैकर समूह के हाथ लगने का मामला सामने आया है। सिरियसिम नाम के एक अज्ञात हैकर समूह ने दावा किया है कि उसने बैंक से जुड़ा संवेदनशील डेटा हासिल किया है। कथित जानकारी में ग्राहकों का निजी विवरण, लोन आवेदन और बैंक खाते खोलने के लिए जमा किए गए दस्तावेज शामिल होने की बात कही गई है। हालांकि, इस दावे की अब तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सोशल मीडिया पोस्ट से सामने आया मामला
साइबर सुरक्षा से संबंधित गतिविधियों पर नजर रखने वाले साइबरपल्स56 नाम के अकाउंट ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से इस मामले की जानकारी साझा की। पोस्ट में दावा किया गया कि हैकर समूह के पास भारतीय स्टेट बैंक से संबंधित बड़ी मात्रा में डेटा मौजूद है।
बताई गई जानकारी के अनुसार, कथित डेटा में 3.75 लाख डेटा एंट्री और 2,722 पीडीएफ दस्तावेज शामिल हैं। डेटा एंट्री सीएसवी प्रारूप में होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र जांच या आधिकारिक पुष्टि के बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई विवरण नहीं दिया गया है।
किन जानकारियों तक पहुंच का दावा?
हैकर समूह के दावे के मुताबिक, कथित तौर पर हासिल किए गए रिकॉर्ड में ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी, ऋण के लिए किए गए आवेदन और बैंक में खाता खोलने से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। इन दस्तावेजों की वास्तविक सामग्री, उनकी समयावधि और उनमें दर्ज जानकारी की प्रामाणिकता अभी स्पष्ट नहीं है।
यदि यह दावा सही साबित होता है, तो मामला ग्राहकों की गोपनीयता और बैंकिंग डेटा की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। व्यक्तिगत दस्तावेजों तक अनधिकृत पहुंच से उनके दुरुपयोग की आशंका पैदा हो सकती है। हालांकि, फिलहाल किसी ग्राहक को हुए नुकसान या डेटा के दुरुपयोग की पुष्टि नहीं हुई है।
बैंक की ओर से आधिकारिक बयान नहीं
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एसबीआई की ओर से इस कथित डेटा लीक पर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि बैंक के आंतरिक सिस्टम में किसी तरह की सेंध लगी है या कथित डेटा किसी अन्य स्रोत से प्राप्त किया गया है।
पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल यह मामला हैकर समूह के दावे और सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी पर आधारित है। केवल डेटा की मात्रा बताए जाने से सुरक्षा उल्लंघन की पुष्टि नहीं होती। वास्तविक स्थिति जानने के लिए तकनीकी जांच और आधिकारिक जानकारी जरूरी है। बैंक की प्रतिक्रिया और जांच से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एसबीआई के ग्राहकों का डेटा वास्तव में लीक हुआ है या नहीं।
