हरियाणा में अभियोजन व्यवस्था का पुनर्गठन अधर में, उप निदेशकों को नहीं मिली स्पष्ट जिम्मेदारी

चंडीगढ़, हरियाणा। हरियाणा सरकार की ओर से फरवरी 2025 में अधिसूचित जिला अभियोजन व्यवस्था अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है। डेढ़ साल से अधिक समय बीतने के बाद भी उप निदेशकों और जिला अटॉर्नी के बीच अधिकारों तथा जिम्मेदारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। आधिकारिक पत्राचार और रिपोर्ट मांगने की प्रक्रिया में पुरानी व्यवस्था के जारी रहने से नई प्रशासनिक संरचना के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।

पुरानी प्रक्रिया के तहत हो रहा पत्राचार

नई व्यवस्था में जिला अटॉर्नी कैडर से पदोन्नत उप निदेशकों को जिला स्तर पर अभियोजन कार्य का प्रबंधन सौंपा गया है। इसके बावजूद अभियोजन निदेशक की ओर से पत्राचार अब भी जिला अटॉर्नी के नाम भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

इसी तरह, कुछ मामलों में जिला स्तर की रिपोर्ट और सूचनाएं नामित उप निदेशकों के बजाय सीधे जिला अटॉर्नी से मांगी जा रही हैं। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बंटवारा किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत लागू किया जा रहा है।

बीएनएसएस की धारा 20 में जिला निदेशालय का प्रावधान

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 20 के तहत राज्य सरकार को राज्य स्तर पर अभियोजन निदेशालय और प्रत्येक जिले में जिला अभियोजन निदेशालय स्थापित करने का प्रावधान दिया गया है। यह प्रावधान पहले की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 25ए से अलग है, जिसमें जिला स्तर पर ऐसे निदेशालय की व्यवस्था स्पष्ट रूप से शामिल नहीं थी।

नई संरचना में अभियोजन अधिकारियों के बीच मामलों की निगरानी और जिम्मेदारियों का बंटवारा महत्वपूर्ण है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 10 वर्ष या उससे अधिक की सजा, आजीवन कारावास या मृत्युदंड वाले मामलों की निगरानी अभियोजन निदेशक करते हैं। सात वर्ष से लेकर 10 वर्ष से कम सजा वाले मामलों की निगरानी उप निदेशकों के जिम्मे है, जबकि सात वर्ष से कम सजा वाले अपराधों की निगरानी सहायक निदेशक करते हैं।

केंद्र सरकार भी दे चुकी है निर्देश

नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार ने अभियोजन निदेशालय में नियुक्तियां पूरी करने पर जोर दिया था। मई 2025 में दिल्ली में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नियुक्तियां जल्द करने की बात कही थी। इसके बाद तीन अक्टूबर 2025 को वह कुरुक्षेत्र में नए आपराधिक कानूनों से संबंधित प्रदर्शनी के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे।

प्रशासनिक स्पष्टता के बिना चुनौतीपूर्ण होगा क्रियान्वयन

जिला अभियोजन व्यवस्था का उद्देश्य आपराधिक मामलों की निगरानी और अभियोजन कार्य को व्यवस्थित बनाना है। इसके लिए अधिकारियों की शक्तियों, कार्यक्षेत्र और जवाबदेही का स्पष्ट निर्धारण आवश्यक है।

हरियाणा में नई व्यवस्था के अधूरे क्रियान्वयन के बीच सबसे बड़ी जरूरत प्रशासनिक दिशा-निर्देशों को स्पष्ट करने की है। जिम्मेदारियों और रिपोर्टिंग प्रक्रिया में स्पष्टता आने के बाद ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि नई व्यवस्था निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप काम कर रही है।

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