कई लोगों को कभी-कभी सीढ़ियां चढ़ते वक्त सांस फूलने या लगातार सूखी खांसी रहने जैसी समस्याएं होती हैं। अगर ये लक्षण धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं और लंबे समय तक बने हुए हैं, तो इन्हें नजरअंदाज करना सही नहीं है। ऐसा हो सकता है कि ये इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) नामक गंभीर फेफड़ों की बीमारी के कारण हों। यह एक क्रॉनिक लंग डिजीज है जिसमें फेफड़ों में हवा पकड़ने वाली थैलियों के पास के टिशू हार्ड और मोटे हो जाते हैं।
इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस की समझ
IPF में ‘इडियोपैथिक’ का अर्थ है कि इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं होता जबकि ‘पल्मोनरी फाइब्रोसिस’ का मतलब है फेफड़ों के टिशू में जख्म के निशान या स्कार बनना। इस स्थिति में फेफड़ों की एल्वियोली की दीवारें मोटी हो जाती हैं, जिससे ऑक्सीजन का रक्त तक पहुँचना कठिन हो जाता है। इससे सांस लेने में कठिनाई बढ़ती है और फेफड़ों की कार्यशीलता प्रभावित होती है।
आईपीएफ की प्रगति व्यक्ति-व्यक्ति अलग होती है, कुछ में धीरे-धीरे वर्षों तक बीमारी बढ़ती है, जबकि दूसरों में तेजी से फेफड़ों की क्षमता कम हो जाती है। यह स्थिति जीवनशैली और इलाज के लिहाज से समय पर पहचान और प्रबंधन मांगती है।
लक्षण और ध्यान देने योग्य बातें
आईपीएफ के शुरुआती लक्षण अत्यंत सामान्य होते हैं, जैसे कि लगातार सूखी खांसी और सीढ़ियां चढ़ते या फिजिकल एक्टिविटी करते समय सांस फूलना। Mayo Clinic के अनुसार थकान, तेज सांस लेना और वजन में कमी भी कुछ संकेत हो सकते हैं। यदि पहले सरलता से दो-तीन मंजिल तक सीढ़ियां चढ़ना संभव था और अब एक मंजिल में भी सांस फूलने लगे तो इस बदलाव को गंभीरता से लेना चाहिए।
खांसी अगर वायरल संक्रमण जैसी बीमारी से होती है और जल्दी ठीक हो जाती है, तो चिंता की जरूरत कम होती है। लेकिन जब सूखी खांसी लगातार बनी रहे, बार-बार लौटे या समय के साथ बढ़े, तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
प्लुमोनरी फाइब्रोसिस फाउंडेशन के मुताबिक फेफड़ों के टिशू में डैमेज और सुधार की असामान्य प्रक्रिया से फाइब्रोसिस होता है, जो धीरे-धीरे फेफड़ों को मोटा और कड़ा बना देता है। इससे ऑक्सीजन की ट्रांसफरिंग क्षमता कमजोर होती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है।
बढ़ती बीमारी के कारण शारीरिक कामों जैसे चलना, सीढ़ियां चढ़ना, और सामान्य घरेलू कार्य करते समय भी सांस फूलना और थकान महसूस होना आम है। शरीर की मांसपेशियों को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, जो फेफड़ों के प्रभावित होने से पूरा नहीं हो पाता।
हालांकि, IPF के लक्षण कई अन्य बीमारियों जैसे अस्थमा, COPD, दिल की बीमारियां, सांस के संक्रमण, और गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) से मिलते-जुलते होते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर सही निदान करना मुश्किल होता है। इसकी वजह से कई बार गलत डायग्नोसिस भी हो सकता है।
अगर लगातार सूखी खांसी, सांस फूलना और थकान बढ़ती जा रही हैं तो इसे सरल समस्या मानकर न टालें। समय पर पल्मोनोलॉजिस्ट से जांच कराना महत्वपूर्ण है, जिससे बीमारी की स्थिति का पता चल सके और उचित इलाज शुरू किया जा सके।
