अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने H-1B वीजा एक्सटेंशन से जुड़ी एक नीति को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है। इस नीति के तहत इमिग्रेशन अधिकारियों को आमतौर पर पुराने फैसलों के आधार पर एक्सटेंशन मंजूर करने का अधिकार था। नए प्रस्ताव से हर एक्सटेंशन की याचिका की पूरी जांच हो सकती है जिससे वीजा प्रक्रिया में कड़ी मेहनत और खर्च बढ़ सकता है।
सरकार का प्रस्ताव और उसके असर
इस प्रस्तावित नियम के अनुसार, USCIS अधिकारी अब एक्सटेंशन से जुड़ी हर याचिका को नए सिरे से आंकेंगे, भले ही पहले मंजूरी दी गई हो। वर्तमान नीति में यदि परिस्थितियां समान रहें तो अधिकारी पिछली मंजूरी को ही मानते थे। नए बदलाव से कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उनके कर्मचारी अभी भी वीजा की शर्तों पर खरे उतरते हैं।
इस बदलाव के कारण कंपनियों पर अतिरिक्त दस्तावेज जमा कराने का दबाव बढ़ेगा और प्रशासनिक खर्च भी बढ़ सकता है। ऐसे में वर्कर्स के लिए वीजा एक्सटेंशन आसान नहीं रहेगा।
H-1B वर्कर्स और कंपनियों पर प्रभाव
भारत के लाखों H-1B वर्कर्स अमेरिका में काम कर रहे हैं। प्रस्ताव लागू होने पर उनके वीजा एक्सटेंशन की जांच कड़ी होगी। DHS का कहना है कि पुरानी नीति धोखाधड़ी पकड़ने में कम प्रभावी थी। नए प्रस्ताव से प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी।
कंपनियों को ‘रिक्वेस्ट फॉर एविडेंस’ (RFE) के तहत अतिरिक्त कागजात देने पड़ सकते हैं, जिससे वीजा प्रक्रिया में देर हो सकती है। यह अतिरिक्त बोझ कंपनियों के लिए वित्तीय दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण साबित होगा।
DHS के अनुमान के मुताबिक, हर साल लगभग 6,044 अतिरिक्त RFE जारी हो सकते हैं और कंपनियों को करीब 1,33,987 डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। इससे USCIS पर कार्यभार बढ़ेगा और प्रक्रिया में जटिलता आएगी।
यह प्रस्ताव फॉर्म I-129 पर लागू होगा, जो H-1B समेत कई गैर-इमिग्रेंट वर्क वीजा के लिए इस्तेमाल होता है। अभी यह केवल प्रस्तावित नियम है और 13 नवंबर 2026 तक इस पर जनता की राय मांगी जा रही है।
इस बदलाव के प्रभाव से अमेरिकी आईटी उद्योग और भारतीय वर्कर्स दोनों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार है, जिसके बाद ही यह बदलाव लागू होगा।
इसलिए H-1B वीजा धारकों और उनकी कंपनियों को नए नियमों के तहत तैयारी करनी होगी ताकि वे वीजा एक्सटेंशन प्रक्रिया को आसानी से पूरा कर सकें। ऐसे बदलाव से भारतीय प्रोफेशनल्स की अमेरिका में नौकरी प्रभावित हो सकती है।
