रोटी हमारी रोजाना की डाइट का अहम हिस्सा है। कई लोग अब गेहूं के आटे की जगह मल्टीग्रेन आटे का उपयोग कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि मल्टीग्रेन आटा खाने से वजन और ब्लड शुगर पर क्या असर पड़ेगा। इस आटे में शामिल अनाजों की मात्रा और आपकी पूरी डाइट की गुणवत्ता इस बात निर्धारित करती है।
मल्टीग्रेन आटा क्या होता है?
मल्टीग्रेन आटा दो या दो से अधिक प्रकार के अनाजों को मिलाकर बनाया जाता है। इसमें गेहूं के साथ जौ, बाजरा, ज्वार, रागी, मक्का, ओट्स जैसे अनाज भी हो सकते हैं। कभी-कभी इसमें दाल जैसे चना या सोयाबीन भी शामिल होते हैं। यह जरूरी नहीं कि हर प्लेckेट की सामग्री समान हो, इसलिए लेबल पढ़ना जरूरी है।
एनसीबीआई के अनुसार, जब आटे में साबुत अनाज शामिल हों, तो इससे फाइबर, बी विटामिन्स और आयरन जैसी पोषक तत्व अच्छी मात्रा में मिलते हैं। साबुत अनाज में अनाज की बाहरी परत, जर्म और एंडोस्पर्म बनाए रहते हैं, जबकि रिफाइंड अनाज में ये भाग हटाए जाते हैं, जिससे कुछ पोषक तत्व कम हो जाते हैं।
मल्टीग्रेन आटे के फायदे
यदि मल्टीग्रेन आटे में साबुत गेहूं, जौ, बाजरा, ओट्स आदि होते हैं, तो यह फाइबर की मात्रा बढ़ा सकता है। फाइबर पाचन को बेहतर रखता है और कब्ज से बचाने में मदद करता है। एनआईएच के अनुसार वयस्कों को रोजाना 22 से 34 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। फाइबर के साथ पर्याप्त पानी पीना भी आवश्यक है।
ब्लड शुगर के नियंत्रण की बात करें तो मल्टीग्रेन रोटी के प्रभाव का अंदाजा इसके अनाजों की किस्म, पीसने का तरीका और डाइट के अन्य भोजन से होता है। सबूतों से पता चला है कि साबुत और कम प्रोसेस किए गए अनाज रिफाइंड अनाज की तुलना में ब्लड शुगर पर धीमा असर डालते हैं। यह इसलिए बेहतर होता है क्योंकि फाइबर ग्लूकोज के ब्लड में लगने की गति को नियंत्रित करता है।
वजन प्रबंधन के लिए भी मल्टीग्रेन आटा उपयोगी हो सकता है। फाइबर की वजह से देर तक भूख नहीं लगती, जिससे बार-बार खाने या स्नैकिंग की संभावना कम हो जाती है। हालांकि, वजन कम करने के लिए कुल आहार और जीवनशैली पर ध्यान देना अनिवार्य है।
मगर ध्यान रखें कि मल्टीग्रेन आटे के फायदे उसकी सामग्री पर निर्भर करते हैं। इसलिए खरीदते समय सबसे पहले सटीक अनाज सूची और फाइबर की मात्रा देखें। साथ ही, संतुलित डाइट में रोटी के साथ दाल, सब्जियां और फल जरूर शामिल करें।
इस प्रकार, मल्टीग्रेन आटा फाइबर और पोषक तत्व बढ़ाने का प्रभावी स्रोत हो सकता है, जो पाचन को सुधारने, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और वजन प्रबंधन में सहायता करता है। पर इसका असर पूरी तरह आपकी डाइट, आटे की गुणवत्ता और खाने की मात्रा पर निर्भर करता है।
अंत में यह कहा जा सकता है कि मल्टीग्रेन रोटी एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है, लेकिन संतुलित भोजन और नियमित जीवनशैली के साथ ही इसके लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। इसलिए ध्यान रखें कि आप किस तरह का मल्टीग्रेन आटा चुनते हैं और उसे डाइट में किस प्रकार शामिल करते हैं।
