हाई हील्स पहनना आज के फैशन का एक अहम हिस्सा बन चुका है, खासकर महिलाओं में। हालांकि, कई बार यह स्टाइल शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। हाई हील्स पहनने से न केवल उसके पहनने वाले के चलने का तरीका बदलता है, बल्कि इससे शरीर के संतुलन और जोड़ों पर भी भारी प्रभाव पड़ता है।
हाई हील्स पहनने से शरीर का संतुलन प्रभावित
जब कोई व्यक्ति हाई हील्स पहनता है, तो पैर और टखनों की स्थिति सामान्य फ्लैट जूतों की तुलना में बदल जाती है। इस कारण शरीर का वजन नई पॉज़ीशन में जाता है। विशेषकर ऊंची और पतली हील्स में जमीन के संपर्क का क्षेत्र कम हो जाता है, जिससे शरीर को जुगाड़ लगाने के लिए मांसपेशियों और जोड़ों को लगातार काम करना पड़ता है। यह बदलाव कदमों की लंबाई, चलने की शैली और संतुलन को प्रभावित करता है। खराब सतह जैसे फिसलन या सीढ़ियों पर चलना और भी मुश्किल हो जाता है।
स्प्रिंगर नेचर के 2023 के रिव्यू के अनुसार, हाई हील्स पहनने वाली महिलाओं में स्थैतिक और गतिशील संतुलन दोनों प्रभावित होते हैं। हालांकि अध्ययन में हील्स की ऊंचाई व परीक्षण विधि में विविधता थी, फिर भी बड़ी संख्या में स्टडीज ने इस प्रभाव को बताया।
बॉडी पोस्चर और पीठ दर्द पर प्रभाव
एनसीबीआई के डेटा के अनुसार, हाई हील्स से एड़ी उठ जाती है और इससे पैरों, टखनों के साथ-साथ शरीर की मुद्रा में भी बदलाव होता है। शरीर संतुलन बनाए रखने के लिए घुटनों, कूल्हों और कमर को अलग तरह से एडजस्ट करना पड़ता है, जिसे पोस्ट्यूरल एडजस्टमेंट कहते हैं। कुछ मामलों में कमर के निचले हिस्से का घुमाव भी बढ़ सकता है।
अधिक समय तक हाई हील्स पहनने से कई लोगों को कमर के निचले हिस्से में खिंचाव और दर्द अनुभव होता है। यह दर्द मुख्य रूप से शरीर के पोस्चर बदलने और मांसपेशियों के दबाव से जुड़ा होता है। रिसर्च गेट की एक स्टडी में देखा गया कि जो महिलाएं दो या अधिक वर्षों तक लगातार हील्स पहनती हैं, उन्हें कमर दर्द की शिकायत अधिक होती है और हील्स की ऊंचाई बढ़ने पर दर्द की तीव्रता भी बढ़ जाती है।
हाई हील्स से कूल्हों पर भी असर पड़ता है। इसके कारण हिप्स की मांसपेशियों को शरीर के संतुलन के लिए अलग तरह से काम करना पड़ता है, जिससे थकान और दर्द हो सकता है। साइंस डायरेक्ट के अध्ययन अनुसार इस तरह की जूतों से धड़ और कूल्हों की मांसपेशियों के संयोजन में भी बदलाव आ सकता है।
हाई हील्स केवल पैरों की स्थिति नहीं बदलतीं, यह पूरे शरीर के बैलेंस और मांसपेशियों के कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं। इससे घुटनों, कूल्हों, टखनों और कमर में सीमित असहजता या चोट का खतरा होता है।
फैशन और आराम के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। यदि हाई हील्स पहनना पसंद है, तो सही फिट, आरामदायक डिजाइन चुनना चाहिए और लंबे समय तक इस्तेमाल से बचना चाहिए। किसी भी बार-बार होने वाले दर्द या असुविधा पर डॉक्टर से सलाह लेना लाभकारी होगा।
इस तरह, फैशन के लिए हाई हील्स पहनना भले ही स्टाइलिश हो, लेकिन इससे शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समझदारी से उपयोग और सावधानी से इन्हें अपनाना जरूरी है।
