बेंगलुरु में केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने गुरुवार को बेंगलुरु पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर जारी धरना समाप्त कर दिया। उन्होंने पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह से मुलाकात कर आश्वासन प्राप्त किया, लेकिन पुलिस को दो दिन के भीतर स्टिंग ऑपरेशन के दोषियों के खिलाफ कदम उठाने की चेतावनी दी।
विरोध प्रदर्शन और पुलिस से बातचीत
कुमारस्वामी ने जद (एस) के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस आयुक्त के साथ करीब 30 मिनट की बातचीत के बाद उन्होंने अपना धरना वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि स्टिंग ऑपरेशन में शामिल अपराधियों की पहचान होनी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए।
उन्होंने पुलिस आयुक्त के आश्वासन के बाद दो दिन का समय दिया। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि इस मामले में एक मुख्य व्यक्ति ने मीडिया का गलत इस्तेमाल किया और गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त है, जिससे मीडिया की प्रतिष्ठा को नुकसान हुआ है। यह व्यक्ति मुख्यमंत्री शिवकुमार के भी करीबी संपर्क में है तथा कहा जाता है कि रणदीप सिंह सुरजेवाला के भी नजदीक है।
कुमारस्वामी ने एक तस्वीर में दिख रहे एक मीडियाकर्मी के सहायक का भी जिक्र किया, जिसे गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति के जरिए उनका नाम इस मामले से जोड़ा जा रहा है और इसकी छानबीन जरूरी है।
राजनीतिक आरोप और न्यायिक जांच की मांग
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि मंत्री और कुछ पुलिस अधिकारी जांच में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार को चुनौती दी कि यदि उनके या पार्टी के खिलाफ कोई साक्ष्य है तो जांच कराई जाए।
कुमारस्वामी ने न्यायिक निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि इसके लिए सीबीआई जांच आवश्यक नहीं है, लेकिन जांच किसी कार्यरत जज की देखरेखी में होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर हिम्मत है तो रिटायर्ड जज से जांच कराएं। मुझे डराने-धमकाने से कोई फर्क नहीं पड़ता।”
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए पुलिस और प्रशासन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि पुलिस दो दिन के भीतर कार्रवाई नहीं करती तो वह फिर से आंदोलन शुरू करेंगे। कुमारस्वामी के इस धरने ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है और अब सबकी नजरें अगले दो दिनों की कार्रवाई पर टिकी हैं।
