रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारतीय वर्कर्स के लिए एक बड़ी राहत दी है। उन्होंने रूस में भारतीय नागरिकों के रोजगार से जुड़ा नया कानून मंजूर किया है, जो काम करने की प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाएगा। यह कदम 12 अक्टूबर को मान्य हुआ, जब पुतिन ने इसे अधिकारिक रूप से अनुबंधित किया।
भारत-रूस के बीच रोजगार समझौता
रूस और भारत की सरकारों ने 5 दिसंबर को नई दिल्ली में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के नागरिकों के लिए अस्थायी रोजगार की व्यवस्था स्थापित करना है। यह समझौता 1 अक्टूबर को रूस के स्टेट ड्यूमा और अगले दिन फेडरेशन काउंसिल ने मंजूरी दी थी। इसके बाद पुतिन के हस्ताक्षर के साथ यह कानून प्रभावी हो गया।
रूस में वर्तमान में करीब 70,000 भारतीय काम कर रहे हैं, जो मुख्यता कंस्ट्रक्शन और टेक्सटाइल सेक्टर्स में हैं। युद्ध के कारण लेबर शॉर्टेज के चलते, रूस में भारतीय श्रमिकों की मांग तेजी से बढ़ रही है। नई व्यवस्था से इनकी संख्या 1,00,000 तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
भारतीय वर्कर्स के नए अवसर और सुरक्षा
इस कानून से भारतीयों के लिए कानूनी सुरक्षा बेहतर होगी, जिससे काम के अधिकार और वेतन का निर्धारण स्पष्ट होगा। इससे पहले कई वर्कर्स को पेपरवर्क और कानूनी प्रक्रियाओं में कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था। अब एक आधिकारिक फ्रेमवर्क होने से उनकी नौकरी की स्थिति अधिक स्थिर होगी।
कंपनियां अब इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी भारतीय स्किल्ड वर्कर्स को तलाश रही हैं। इससे भारतीयों को केवल शारीरिक श्रम वाले सेक्टर्स तक सीमित रहने की बजाय बेहतर अवसर मिलेंगे।
समझौते की प्रक्रिया से वीजा और वर्क परमिट प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बन जाएगी। इससे रोजगार पाने का समय कम होगा और कागजी कार्रवाई में भी कमी आएगी।
हालांकि, भारतीय वर्कर्स को सावधानी बरतनी होगी। रूस में फर्जी नौकरियों और स्कैम से बचने के लिए सही तरीके से अप्लाई करना जरूरी है। भारतीय दूतावास ने भी यात्रियों को धोखाधड़ी से बचने की सलाह दी है। खासकर कुछ मामलों में फर्जी जॉब के नाम पर लोगों को सेना में भर्ती किए जाने की रिपोर्ट मिली है, जिसे देखते हुए सतर्कता आवश्यक है।
इस नए कानून और दोनों देशों के समझौते के बाद, भारतीयों के लिए रूस में रोजगार के नए द्वार खुलने की उम्मीद है। यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी का भी संकेत देती है, जो आने वाले समय में कामगारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
