मनाली, हिमाचल प्रदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मनाली दौरे के दौरान उनके भोजन में कुल्लू की पारंपरिक खाद्य संस्कृति की झलक देखने को मिली। प्रशासन ने राष्ट्रपति के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था की, जिसमें स्थानीय अनाज और पारंपरिक व्यंजनों को प्रमुखता दी गई।
मंगलवार रात राष्ट्रपति ने गुच्छी की सब्जी, लाल चावल और राजमाह का स्वाद लिया। बुधवार सुबह नाश्ते में कुट्टू के आटे का पराठा परोसा गया। इसके साथ काउनी, ओघला और बेसा का सूप भी दिया गया।
दोपहर के भोजन में बाथू की खीर, कच्चा पपीता और खुमानी का मीठा शामिल रहा। तोरी और भिंडी की सब्जी के साथ गुच्छी और रागी का सूप भी परोसा गया। कद्दू आंबले की सब्जी और लाल चावल भी दोपहर के भोजन का हिस्सा रहे।
कुल्लू के स्थानीय अनाज की खासियत
प्रशासन ने राष्ट्रपति के भोजन में कई ऐसे पारंपरिक अनाज शामिल किए, जो धीरे-धीरे कम प्रचलन में आ रहे हैं। इन अनाजों को प्राकृतिक खाद से उगाया जाता है और रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
कुल्लू में कुट्टू को कुटु भी कहा जाता है। इसे अंग्रेजी में बकव्हीट कहा जाता है। हिमाचली स्थानीय बोलियों में इसके लिए ओगला, ब्रेश, टाऊ और फाफड़ जैसे नाम भी प्रचलित हैं।
कुट्टू कुल्लू और हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों का पारंपरिक खाद्य पदार्थ है। वैज्ञानिक रूप से यह सच्चा अनाज नहीं है। यह एक पौधे के तिकोने आकार वाले फल का बीज होता है, इसलिए इसे स्यूडोसीरियल कहा जाता है।
