हूतियों के बढ़ते खतरे से परेशान सऊदी अरब, ट्रंप से दो बार मांगी मदद; अमेरिका ने सीधे युद्ध से किया इनकार

रियाद, सऊदी अरब

यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने सऊदी अरब और अमेरिका के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की हूतियों के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमले की मांग को ठुकरा दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद बिन सलमान ने गुरुवार को ट्रंप से दो बार फोन पर बात की और हूतियों के खिलाफ तत्काल सैन्य कार्रवाई की अपील की। ट्रंप ने हालांकि इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।

क्यों बढ़ी सऊदी अरब की चिंता?

हूतियों ने हाल के दिनों में यमन के लाल सागर तट पर अपनी स्थिति मजबूत की है। रॉयटर्स के मुताबिक, संगठन ने रणनीतिक पेरिम द्वीप और तटीय धुबाब क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। पेरिम द्वीप बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास स्थित है और समुद्री यातायात के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र पर किसी एक पक्ष का नियंत्रण लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

हूतियों की बढ़त से सऊदी अरब की सुरक्षा और तेल निर्यात को लेकर चिंता बढ़ी है। लाल सागर का समुद्री मार्ग सऊदी अरब के लिए महत्वपूर्ण है और क्षेत्र में जारी तनाव के कारण इसका रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है।

ट्रंप ने क्यों ठुकराई मांग?

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन फिलहाल हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहता। अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर केंद्रित करना चाहता है। अमेरिकी नीति का उद्देश्य एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध में उलझने से बचना बताया जा रहा है।

इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका सऊदी अरब से दूरी बना रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, वाशिंगटन सऊदी अरब को सुरक्षा समर्थन बढ़ा रहा है और दोनों देशों के बीच सैन्य समन्वय जारी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने सऊदी अधिकारियों से तत्काल चर्चा भी की है।

लाल सागर पर बढ़ा दबाव

सऊदी अरब लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वहीं हूतियों की आगे की गतिविधियों से बाब-अल-मंदेब में तनाव बढ़ने की आशंका है।

फिलहाल ट्रंप ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाई है। ऐसे में सऊदी अरब को हूतियों से निपटने के लिए अपनी सैन्य रणनीति और क्षेत्रीय सहयोग दोनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह संकट पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक समुद्री व्यापार दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।

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