नई दिल्ली, दिल्ली
8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाओं के बीच केंद्रीय कर्मचारियों के दिवाली बोनस की गणना के मौजूदा फॉर्मूले में बदलाव की मांग तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बोनस की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाली ₹7,000 की सीमा अब पुरानी हो चुकी है। इसे हटाकर बोनस की गणना मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन या 8वें वेतन आयोग के तहत तय होने वाले नए न्यूनतम वेतन के आधार पर करने की मांग की जा रही है।
वर्तमान व्यवस्था में नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस यानी NPLB और कुछ अन्य बोनस की गणना ₹7,000 की अधिकतम गणना सीमा के आधार पर की जाती है। इसका मतलब यह है कि कर्मचारी का वास्तविक मूल वेतन इससे अधिक होने के बावजूद बोनस की गणना में ₹7,000 को आधार माना जाता है।
यदि ₹18,000 के मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन को आधार बनाया जाता है और 30 दिनों के बोनस की गणना की जाती है, तो राशि लगभग ₹17,763 तक पहुंच सकती है। मौजूदा व्यवस्था में यह राशि करीब ₹6,908 के आसपास रहती है।
कर्मचारी संगठनों की मांग है कि ₹7,000 की पुरानी सीमा को खत्म कर बोनस को वास्तविक न्यूनतम मूल वेतन से जोड़ा जाए। यदि 8वें वेतन आयोग के बाद न्यूनतम वेतन ₹26,000 से ₹34,500 के बीच तय होता है और यही राशि बोनस की गणना का आधार बनती है, तो 30 दिनों का बोनस करीब ₹25,600 या उससे अधिक हो सकता है।
इस बदलाव का असर रेलवे, डाक विभाग, आयुध कारखानों और अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारियों पर पड़ सकता है। रेलवे के अराजपत्रित कर्मचारियों को मिलने वाले 78 दिनों के उत्पादकता आधारित बोनस पर भी इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है।
हालांकि, अभी यह प्रस्ताव मांग के स्तर पर है। बोनस फॉर्मूले में बदलाव और अंतिम राशि का फैसला सरकार की ओर से किए जाने वाले आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
