नई दिल्ली, दिल्ली
भारत में अगस्त के दौरान चीनी की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक तेजी दर्ज की गई है। हालांकि चीनी उद्योग का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। कीमतों में बढ़ोतरी के बीच एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि दुनिया में सबसे ज्यादा चीनी उत्पादन करने वाले देशों में भारत किस स्थान पर है और पड़ोसी देश पाकिस्तान की स्थिति क्या है।
उत्पादन से ज्यादा रही घरेलू खपत
वर्ष 2024-25 में भारत में चीनी की घरेलू खपत करीब 281 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि कुल उत्पादन लगभग 261 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया। यानी इस अवधि में घरेलू खपत उत्पादन से करीब 20 लाख मीट्रिक टन अधिक रही।
हालांकि उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि केवल एक वर्ष के उत्पादन और खपत के अंतर के आधार पर देश में चीनी की कमी नहीं मानी जा सकती। पिछले वर्षों के उपलब्ध स्टॉक और उत्पादन व्यवस्था के कारण बाजार की जरूरतें पूरी की जा रही हैं।
कई वर्षों तक उत्पादन रहा खपत से अधिक
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018-19 से लेकर 2023-24 तक भारत में चीनी का उत्पादन लगातार घरेलू खपत से अधिक रहा। लेकिन वर्ष 2024-25 में उत्पादन घटकर 261 लाख मीट्रिक टन पर आ गया, जबकि खपत बढ़कर 281 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई।
इथेनॉल उत्पादन भी बना अहम कारण
देश में गन्ने और चीनी के उपयोग का एक बड़ा हिस्सा इथेनॉल उत्पादन से भी जुड़ा है। सरकार द्वारा पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दिए जाने के बाद गन्ने से इथेनॉल उत्पादन का महत्व बढ़ा है। ऐसे में चीनी उद्योग को खाद्य जरूरतों और इथेनॉल उत्पादन के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
चीनी उत्पादन में भारत दुनिया के प्रमुख देशों में
भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल है। ब्राजील भी वैश्विक चीनी उत्पादन में प्रमुख स्थान रखता है। इसके मुकाबले पाकिस्तान का चीनी उत्पादन भारत से काफी कम है। भारत में बड़ी संख्या में चीनी मिलें संचालित होती हैं और गन्ना उत्पादन कई राज्यों की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फिलहाल उद्योग का कहना है कि देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, हालांकि कीमतों में तेजी उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय जरूर बनी हुई है।
