चेन्नई, तमिलनाडु
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार के 100 दिन पूरे होने के साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय को नए स्थान पर ले जाने का मुद्दा राजनीतिक विवाद में बदल गया है। भारतीय जनता पार्टी ने चेन्नई के फोर्ट सेंट जॉर्ज से नमक्कल कविंजर मालिगई में मुख्यमंत्री कार्यालय स्थानांतरित करने के लिए जारी किए गए करीब ₹5.54 करोड़ के टेंडर को लेकर सवाल उठाए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय को फोर्ट सेंट जॉर्ज के मुख्य भवन से हटाकर उसी सरकारी परिसर में स्थित नमक्कल कविंजर मालिगई की 10वीं मंजिल पर ले जाने की योजना है। सरकार के अनुसार, मौजूदा कार्यालय में जगह की कमी है और मुख्यमंत्री, सचिवों तथा सलाहकारों के लिए पर्याप्त कार्यक्षेत्र उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से नए स्थान पर कार्यालय तैयार करने का निर्णय लिया गया है।
नए कार्यालय में मुख्यमंत्री का कक्ष, अधिकारियों के लिए कमरे, बैठक की व्यवस्था, सम्मेलन कक्ष और दूसरी प्रशासनिक सुविधाएं विकसित की जानी हैं। लोक निर्माण विभाग ने इसके लिए काम शुरू किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नए कार्यालय के लिए करीब ₹5.54 करोड़ का टेंडर जारी किया गया है और काम को निर्धारित समय में पूरा करने की योजना है।
इसी प्रक्रिया को लेकर भाजपा ने सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष की ओर से दावा किया गया कि नवीनीकरण का काम शुरू होने के बाद टेंडर जारी किया गया। सवाल यह है कि यदि विभागीय स्तर पर काम पहले से चल रहा था तो औपचारिक टेंडर बाद में क्यों निकाला गया। भाजपा ने इसे पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।
हालांकि, सरकार ने कार्यालय स्थानांतरण के फैसले को प्रशासनिक जरूरत से जोड़ा है। विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि अधिकारियों के मौजूदा कार्यस्थल छोटे हैं तथा शौचालय और आगंतुकों के लिए सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। सरकार का कहना है कि नया स्थान अधिकारियों के लिए अधिक सुविधाजनक होगा।
इस पूरे मामले में अभी तक भ्रष्टाचार का कोई अंतिम या स्वतंत्र आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए भाजपा के आरोपों को आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि टेंडर प्रक्रिया, खर्च और निर्माण कार्य से जुड़े दस्तावेजों में क्या सामने आता है।
