मुंबई, महाराष्ट्र
टाटा समूह की सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी नेल्को लिमिटेड ने डायरेक्ट-टू-डिवाइस कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अमेरिका की लूनर होल्डको इंक. में 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 167 करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की है। इस रणनीतिक निवेश का लक्ष्य भारत और दक्षिण एशिया में D2D और IoT कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है।
नेल्को का बाजार पूंजीकरण करीब 2,464 करोड़ रुपये बताया गया है। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से इसे टाटा समूह की सबसे छोटी सूचीबद्ध कंपनी बताया जा रहा है। कंपनी टाटा पावर की सहायक कंपनी है और सैटेलाइट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में काम करती है।
167 करोड़ रुपये का निवेश क्यों खास है?
नेल्को के अनुसार, लूनर होल्डको में 20 मिलियन डॉलर का निवेश कंपल्सोरिली कन्वर्टिबल डिबेंचर यानी CCDs के माध्यम से किया जाएगा। कंपनी को इस निवेश पर सालाना 7 प्रतिशत का कंपाउंडेड रिटर्न मिलने की जानकारी दी गई है।
हालांकि, निवेश के बाद भी नेल्को को लूनर होल्डको पर नियंत्रण नहीं मिलेगा। यह समझौता मुख्य रूप से रणनीतिक और तकनीकी सहयोग पर आधारित है।
लूनर होल्डको को एल्वियो मोबाइल के नाम से जाना जाता है। दोनों कंपनियों की साझेदारी का मकसद ऐसी कनेक्टिविटी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें स्मार्टफोन और दूसरे उपकरण सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से जुड़ सकें।
क्या बिना टावर चलेगा मोबाइल?
D2D तकनीक में मोबाइल फोन को सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट करने की क्षमता विकसित की जाती है। पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क में फोन को नेटवर्क उपलब्ध कराने के लिए जमीन पर मौजूद सेल टावरों का इस्तेमाल होता है। D2D तकनीक इस व्यवस्था के साथ एक अतिरिक्त कनेक्टिविटी विकल्प उपलब्ध करा सकती है।
इसका सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों में हो सकता है जहां मोबाइल टावर लगाना कठिन है। दूरदराज के गांवों, पहाड़ी इलाकों और समुद्री क्षेत्रों में सैटेलाइट कनेक्टिविटी उपयोगी साबित हो सकती है।
IoT के लिए भी महत्वपूर्ण
इस साझेदारी का दूसरा बड़ा क्षेत्र IoT यानी इंटरनेट ऑफ थिंग्स है। इसमें सेंसर, ट्रैकिंग सिस्टम, मशीनों और अन्य स्मार्ट उपकरणों को इंटरनेट से जोड़ा जाता है। सैटेलाइट आधारित कनेक्टिविटी से ऐसे उपकरण उन जगहों पर भी काम कर सकते हैं जहां पारंपरिक नेटवर्क सीमित है।
हालांकि, D2D तकनीक का विस्तार नियामकीय मंजूरियों, नेटवर्क क्षमता और डिवाइस सपोर्ट जैसी कई चीजों पर निर्भर करेगा।
नेल्को का यह निवेश भारत में सैटेलाइट आधारित कनेक्टिविटी के भविष्य को लेकर टाटा समूह की रणनीतिक दिलचस्पी को दर्शाता है।
