नेपाल से सबसे ज्यादा चीनी नागरिक हुए डिपोर्ट, अमेरिकी दूसरे और बांग्लादेशी तीसरे नंबर पर; 5 साल में 2,267 विदेशी निकाले गए

काठमांडू, नेपाल

नेपाल में इमिग्रेशन कानूनों का उल्लंघन करने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ की गई कार्रवाई के पांच साल के आंकड़े सामने आए हैं। नेपाल के इमिग्रेशन विभाग की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच कुल 2,267 विदेशी नागरिकों को देश से निष्कासित किया गया। इनमें सबसे ज्यादा संख्या चीनी नागरिकों की रही।

इमिग्रेशन विभाग के अनुसार, इस पांच साल की अवधि में 695 चीनी नागरिकों को नेपाल से बाहर भेजा गया। यह कुल निष्कासित विदेशी नागरिकों का 30.65 प्रतिशत है। यानी इस अवधि में नेपाल से निष्कासित किए गए प्रत्येक 100 विदेशी नागरिकों में लगभग 31 चीनी नागरिक थे।

अमेरिका दूसरे स्थान पर

राष्ट्रीयता के आधार पर निष्कासित किए गए विदेशी नागरिकों की सूची में अमेरिका दूसरे स्थान पर रहा। 2021 से 2025 के बीच नेपाल ने 191 अमेरिकी नागरिकों को देश से निष्कासित किया।

वहीं, बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या 145 रही और बांग्लादेश इस सूची में तीसरे स्थान पर रहा। इसके बाद यूनाइटेड किंगडम और पाकिस्तान के नागरिकों का नंबर आया। निष्कासन की संख्या के आधार पर ब्रिटेन चौथे और पाकिस्तान पांचवें स्थान पर रहा।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि पांच वर्षों के दौरान नेपाल में इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन को लेकर विदेशी नागरिकों पर कार्रवाई की गई और चीनी नागरिकों की संख्या इस सूची में सबसे ज्यादा रही।

चीन के नागरिकों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी

2021 से 2025 के बीच नेपाल से कुल 2,267 विदेशी नागरिकों को निष्कासित किया गया। इनमें 695 चीनी नागरिक थे। 695 का आंकड़ा कुल निष्कासनों का 30.65 प्रतिशत है।

दूसरी ओर, 191 अमेरिकी नागरिकों को निष्कासित किया गया, जबकि बांग्लादेश के 145 नागरिक इस कार्रवाई की जद में आए। इस तरह चीन और दूसरे स्थान पर मौजूद अमेरिका के बीच निष्कासन की संख्या में बड़ा अंतर रहा।

रिपोर्ट में इन नागरिकों को इमिग्रेशन कानूनों के उल्लंघन के मामलों से जोड़ते हुए निष्कासन का आंकड़ा दिया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अलग-अलग मामलों में उल्लंघन किए गए नियमों या धाराओं का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।

सिर्फ निष्कासन की संख्या से दर तय करना सही नहीं

चीनी नागरिकों की संख्या सबसे अधिक होने के बावजूद इसे सीधे तौर पर यह नहीं माना जा सकता कि चीन के नागरिकों में इमिग्रेशन कानूनों के उल्लंघन की दर भी सबसे ज्यादा रही। इसके लिए संबंधित देशों से नेपाल आने वाले नागरिकों की कुल संख्या को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

मसलन, अगर किसी देश के नागरिक बड़ी संख्या में नेपाल आते हैं, तो उस देश के नागरिकों के खिलाफ निष्कासन की संख्या भी दूसरे देशों की तुलना में अधिक हो सकती है। इसी तरह पर्यटकों, कारोबारियों, छात्रों और अन्य श्रेणियों में आने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या भी आंकड़ों की व्याख्या को प्रभावित कर सकती है।

इसलिए उपलब्ध आंकड़े मुख्य रूप से यह बताते हैं कि पांच साल के दौरान नेपाल से कितने विदेशी नागरिकों को निष्कासित किया गया और उनमें किस राष्ट्रीयता के नागरिकों की संख्या कितनी रही।

पांच साल के आंकड़ों में चीन सबसे आगे

नेपाल के इमिग्रेशन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच 2,267 विदेशी नागरिकों को देश से निष्कासित किया गया। इनमें चीन के 695 नागरिकों के साथ चीन पहले स्थान पर रहा।

अमेरिका 191 नागरिकों के साथ दूसरे और बांग्लादेश 145 नागरिकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यूनाइटेड किंगडम चौथे और पाकिस्तान पांचवें स्थान पर रहे।

नेपाल में विदेशी नागरिकों के लिए इमिग्रेशन नियमों का पालन जरूरी है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों द्वारा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें देश से निष्कासन भी शामिल है।

फिलहाल पांच साल के उपलब्ध आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि नेपाल से निष्कासित विदेशी नागरिकों में चीनी नागरिकों की संख्या सबसे अधिक रही। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग देशों के नागरिकों की कानून उल्लंघन दर के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए अतिरिक्त जानकारी की जरूरत होगी।

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