नई दिल्ली, दिल्ली
छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने हाल ही में हुए जतार मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की निंदा की है। संगठन ने कहा है कि छात्रों की जायज मांगों को लेकर चल रहे इस प्रदर्शन को ‘‘हाइजैक’’, अर्थात् अपहरण कर लिया गया है। एबीवीपी ने सरकार से आग्रह किया है कि परीक्षा सुधारों के लिए एक पैनल का गठन किया जाए ताकि संस्थागत सुधारों के तहत समस्याओं का समाधान किया जा सके।
एबीवीपी के एक बयान में कहा गया है कि ‘‘हम उन कुछ तत्वों की निंदा करते हैं, जिन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक रूप से भड़काने का प्रयास किया। छात्रों की वास्तविक चिंताओं को संवाद, पारदर्शिता और संस्थागत सुधारों के जरिए ही हल किया जाना चाहिए।’’ संगठन ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार लाने के लिए सभी पक्षों को साथ बैठकर संवाद करना आवश्यक है और हिंसा इसका कोई रास्ता नहीं है।
इस बयान के जरिए एबीवीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पें छात्रों की मूल मांगों का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘हम सभी छात्रों से अपील करते हैं कि वे संयम और समझदारी से काम लें और अपने विचारों को शांति पूर्ण तरीकों से सरकार तक पहुंचाएं।’’
वहीं, शिक्षाविद और विशेषज्ञ भी मानते हैं कि छात्रों की समस्या को जल्द और प्रभावी रूप से सुलझाने के लिए जरूरी है कि सरकार विद्यार्थियों के साथ खुलकर संवाद करे। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार की आवश्यकता है और उसके लिए पारदर्शिता और सबकी सहभागिता बेहद महत्वपूर्ण है। पैनल के गठन से यह संभव हो सकता है कि परीक्षा प्रणाली में व्याप्त खामियों को पहचान कर उनका स्थायी समाधान निकाला जाए।
ज्ञात हो कि पिछले कुछ समय से छात्रों द्वारा परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन जारी हैं। हालांकि कुछ प्रदर्शन हिंसक हो गए, परंतु अधिकांश छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने के पक्षधर हैं। एबीवीपी का बयान इन शांतिपूर्ण छात्रों के समर्थन में आया है और यह स्पष्ट करता है कि विवादों से दूर रहकर संवाद और संवैधानिक माध्यम ही समस्या का सही हल है।
सरकार की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आती रही है और उन्होंने छात्रों की मांगों को समझने का आश्वासन दिया है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही एक समिति का गठन कर विशेषज्ञ और छात्र प्रतिनिधि मिलकर इस विषय पर चर्चा करेंगे। इस तरह के संवाद से परीक्षा प्रणाली में न केवल सुधार होंगे बल्कि छात्रों के बीच विश्वास भी बढ़ेगा।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक सुनियोजित और समझदार प्रयास की सख्त जरूरत है। हिंसा और असमझदारी से समाधान नहीं निकलेगा, इसलिए सभी पक्षों को मिलकर संवाद और पारदर्शिता के माध्यम से कार्य करना होगा ताकि भविष्य की पीढ़ियां बेहतर शिक्षा प्रणाली का लाभ उठा सकें।
