दिल्ली रैली के लिए पंजाब-हरियाणा सीमा पर किसान रोके गए, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन

चंडीगढ़, पंजाब/हरियाणा – दिल्ली में होने वाली किसान रैली के लिए बड़ी संख्या में किसान पंजाब और हरियाणा से दिल्ली की ओर सही तरीके से जा रहे थे, लेकिन हरियाणा सरकार ने उनकी राह में कई बाधाएँ खड़ी कर दी हैं। भाजपा शासित हरियाणा सरकार द्वारा सीमा पर बैरिकेडिंग कर किसानों को रोक दिया गया है। देश बचाओ मोर्चा के किसान नेता और समन्वयक सर्वान सिंह पंधेर ने बताया कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से रैली में भाग लेना चाहते थे, लेकिन उनकी आवाज दबाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

सर्वान सिंह पंधेर के अनुसार, किसान संघटन कई महीनों से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है और कृषि क्षेत्र की जगह विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंचाएगा। इसलिए उन्होंने दिल्ली में होने वाली इस रैली को शांति पूर्वक और मजबूती के साथ आयोजित करने का निर्णय लिया था।

हरियाणा की सीमाओं पर लगाए गए बैरिकेड्स में पुलिसकर्मी भी तैनात हैं जो किसी भी तरह के भीड़ को रोकने के लिए सतर्क हैं। किसान नेता दावा कर रहे हैं कि यह कार्यभार राजनीतिक है और किसानों की आवाज़ को दबाने की कोशिश है। इसके बावजूद किसान रैलियों को रद्द नहीं करने का ऐलान कर चुके हैं और वे किसी भी हाल में राजधानी दिल्ली पहुंचना चाहते हैं।

किसानों के इस विरोध प्रदर्शन को लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध बढ़ता जा रहा है। किसान चाहते हैं कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों को पूरी तरह से वापस ले और व्यापार समझौतों में किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आगे भी अपने आंदोलन को तेज करेंगे।

पिछले कुछ महीनों से किसान संगठनों द्वारा विविध राज्यों में प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य कृषि से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर उठाना है। दिल्ली में प्रस्तावित यह रैली भी इसी कड़ी की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से किसानों ने हिस्सा लेने की योजना बनाई है।

हालांकि हरियाणा पुलिस का कहना है कि उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाए हैं और किसी को भी ज़बरदस्ती रोका नहीं गया है। सरकार का कहना है कि किसानों के हितों की सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था को भी बनाए रखना उतना ही आवश्यक है।

किसानों के इस संगठित आंदोलन को लेकर भविष्य में और क्या कदम उठाए जाएंगे, यह विषय अभी भी संवेदनशील बना हुआ है। लेकिन इतना तय है कि किसान दिल्ली तक अपनी आवाज़ पहुंचाने के लिए संकल्पित हैं और उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

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