मलयालम अभिनेत्री लेना कुमार की मेनोपॉज पर नई किताब

कोच्चि, केरल: मलयालम फिल्म अभिनेत्री लेना कुमार ने हाल ही में मेनोपॉज के विषय पर अपनी दूसरी किताब लिखी है, जिसमें वे पेरिमेनोपॉज के अनुभव और उससे जूझ रही महिलाओं की मदद करने की अपनी इच्छा व्यक्त करती हैं। इस पुस्तक के माध्यम से वे महिलाओं के जीवन में इस स्वाभाविक प्रक्रिया को सहज और सकारात्मक रूप से समझने का प्रयास करती हैं।

लेना ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मेनोपॉज पर उन्होंने अपनी पहली किताब की सफलता के बाद इस क्षेत्र में और गहराई से अध्ययन किया है। उन्होंने बताया कि पेरिमेनोपॉज, जो मेनोपॉज से पहले की अवस्था होती है, महिलाओं के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसलिए इस विषय पर जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है ताकि महिलाएं समय पर सहायता और सही जानकारी पा सकें।

अभिनेत्री ने कहा कि समाज में मेनोपॉज को लेकर कई मिथक और गलतफहमियां पायी जाती हैं, जो महिलाओं के लिए झिझक और शर्म का कारण बनती हैं। उनकी नई किताब इन्हीं मिथकों को तोड़ने और महिलाओं को अपने शरीर और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने का प्रयास है।

लेना कुमार इस बात पर भी जोर देती हैं कि मेनोपॉज से गुजरने वाली महिलाओं के लिए परिवार और समाज का समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि उनकी किताब में पेरिमेनोपॉज के दौरान होने वाले शारीरिक लक्षणों, मानसिक उतार-चढ़ाव, और प्रभावी उपचार के तरीकों पर विस्तृत जानकारी दी गई है। इसके अलावा, योग और भोजन जैसे प्राकृतिक उपायों को भी विस्तार से बताया गया है जिससे महिलाएं बेहतर जीवन जी सकें।

लेना ने उम्मीद जताई कि उनकी किताब अन्य महिलाओं के लिए मार्गदर्शक साबित होगी और उन्हें आत्मविश्वास के साथ इस महत्वपूर्ण जीवन पड़ाव से गुजरने में सहायता करेगी। साथ ही, उन्होंने सभी महिलाओं से कहा कि वे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और किसी भी बदलाव पर डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।

मलयालम सिनेमा की इस प्रमुख अभिनेत्री का मानना है कि साहित्य के माध्यम से समाज में महिलाओं से जुड़ी संवेदनशील विषयों पर खुलकर चर्चा हो सकती है जिससे बेहतर समझ और सहानुभूति निर्मित होगी। उनकी यह पहल न केवल कला जगत बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान मानी जा रही है।

लेना कुमार की यह पुस्तक जल्द ही ऑनलाइन और पुस्तकों की दुकानों पर उपलब्ध होगी। यह उन महिलाओं के लिए एक मूल्यवान संसाधन साबित होगी जो मेनोपॉज के विभिन्न चरणों को समझना और उनसे निपटना चाहती हैं।

इस पहल को मेनोपॉज पर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो महिलाओं के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति दोनों को बेहतर बनाने में सहायक होगा।

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