चंडीगढ़, पंजाब। केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार द्वारा पंजाब में आतंकवाद के दौर के सभी पीड़ितों की स्मृति में की गई अरदास का खुले मन से स्वागत किया है। उन्होंने इसे मानवता, न्याय और सामाजिक सौहार्द का महत्वपूर्ण संदेश बताया। बिट्टू ने कहा कि आतंकवाद के दौरान जान गंवाने वाले निर्दोष व्यक्तियों को समान सम्मान मिलना अत्यंत आवश्यक है।
चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि अरदास केवल किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आतंकवाद के दौरान मारे गए हर निर्दोष व्यक्ति को याद किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस अरदास में बस यात्रियों, पुलिसकर्मियों, लोक सेवकों और अन्य सभी निर्दोष पीड़ितों को शामिल किया गया, जो समाज में एकजुटता और सकारात्मकता का परिचायक है।
बिट्टू ने आगे कहा कि पंजाब ने इतिहास के सबसे कठिन और भयावह आतंकवादी दौर को झेला है, जिसमें हजारों परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और लंबे समय तक हिंसा और विभाजन के प्रभावों को सहना पड़ा। इस पीड़ा को समझना और हर निर्दोष पीड़ित के प्रति सम्मान दिखाना समाज में आपसी विश्वास को बढ़ावा देता है।
उन्होंने कहा, “सिख धर्म हमेशा से शांति, न्याय, साहस और मानवता के मार्ग पर चलने का संदेश देता है। यह किसी प्रकार की हिंसा, घृणा या भेदभाव का समर्थन नहीं करता। सभी पीड़ितों की स्मृति में सामूहिक अरदास करने से समाज में भाईचारे और मेल-जोल को बढ़ावा मिलता है।”
केंद्रीय राज्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के दर्द को स्वीकार करते हुए पीड़ितों को समान सम्मान देना ही समाज में न्याय और सामाजिक उपचार की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने पंजाब के लोगों से अपील की कि वे अतीत की त्रासदियों से सबक लेकर आगे बढ़ें और शांति, विकास एवं सौहार्द के साथ जीवन जियें।
इस अवसर पर बिट्टू ने कहा कि ऐसे अनुभव हमें एकजुट होकर आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए जहां सभी धर्म, वर्ग और समुदाय के लोगों को समान अवसर और सम्मान मिले। गांधीवादी विचारों और मानवतावादी मूल्यों की ओर लौटना इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।
अंत में उन्होंने सभी आतंकवाद पीड़ितों के परिवारों को सांत्वना दी और आशा जताई कि भविष्य में पंजाब और देश में कभी भी ऐसी हिंसात्मक घटनाएं न हों, और सभी लोग मिलजुलकर खुशहाल जीवन जिएं।
