अमृतसर, पंजाब। महिला बंदियों के पुनर्वास और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय जेल अमृतसर में ‘प्रोजेक्ट उड़ान’ नामक एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है। इस परियोजना का उद्घाटन पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया द्वारा किया गया। ‘प्रोजेक्ट उड़ान’ के तहत महिला बंदियों को कौशल विकास के क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे जेल से बाहर आने के बाद आत्मनिर्भर बन सकें।
यह कार्यक्रम पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें पंजाब स्टेट चैप्टर, रीजनल फैशन टेक्स एंड टेक फोरम और स्टूडियो बाय हिमानी अरोड़ा का सहयोग रहा। राज्यपाल कटारिया ने कहा कि पुनर्वास का सबसे मजबूत माध्यम शिक्षा, कौशल विकास और श्रम की गरिमा होती है। उद्योग और सरकार के बेहतर सहयोग से समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने से समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा। पीएचडीसीसीआई के पंजाब स्टेट चैप्टर के चेयरमैन करण गिल्होत्रा ने बताया कि इस कौशल विकास केंद्र का उद्देश्य महिला बंदियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण देना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है ताकि वे जेल से रिहा होने के बाद सम्मानपूर्ण जीवन शुरू कर सकें।
‘प्रोजेक्ट उड़ान’ की प्रमुख संचालक और रीजनल फैशन टेक्स एंड टेक फोरम की चेयर हिमानी अरोड़ा ने बताया कि इस केंद्र में सिलाई, कढ़ाई, टेक्सटाइल क्राफ्ट और आधुनिक फैशन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का मकसद न केवल तकनीकी कौशल देना है, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और उद्यमशीलता की भावना भी विकसित करना है, जिससे वे स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकें।
इस अवसर पर राज्यपाल ने महिला बंदियों को सिलाई मशीनें भेंट कीं और उन्हें प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सही दिशा-निर्देशन और कौशल विकास के दम पर जीवन में नई शुरुआत की जा सकती है।
कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक प्रताप सिंह, केंद्रीय जेल के अधीक्षक राजीव कुमार अरोड़ा, पीएचडीसीसीआई के पदाधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। समापन सभा में उप महानिरीक्षक (जेल) एस.एस. मान ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ‘प्रोजेक्ट उड़ान’ महिला बंदियों के सफल पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ने में मददगार साबित होगा।
करीब 200 महिला बंदियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और इसे अपने भविष्य की दिशा बदलने वाला प्रेरणादायक कदम बताया। यह परियोजना महिला बंदियों के पुनर्वास में एक नई उम्मीद और अवसर लेकर आई है।
