चंडीगढ़। पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने रविवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर कड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार कर्ज लेकर पंजाब को गहरे वित्तीय संकट में धकेल रही है। उन्होंने सरकार की नीतियों को समृद्ध पंजाब की कल्पना को खत्म करने वाला बताते हुए इसे “कंगाल पंजाब” में बदलने का दोषी ठहराया।
ढिल्लों ने 10 जुलाई को वित्त विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना का हवाला दिया, जिसमें पंजाब सरकार ने 1,000 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने की घोषणा की थी। उन्होंने इसे वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के राजस्व वृद्धि के दावों की पोल खोलने वाला बताया।
हालांकि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा मीडिया में वार-वार जीएसटी, वैट और आबकारी से होने वाली आय में बढ़ोतरी का दावा करते रहते हैं, लेकिन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि बार-बार कर्ज लेने की प्रवृत्ति इससे भिन्न तस्वीर पेश करती है।
ढिल्लों के मुताबिक, आप सरकार ने वित्तीय वर्षों में बहुत बड़े कर्ज के आंकड़े लिए हैं: वर्ष 2022-23 में लगभग 24,000 करोड़ रुपए, 2023-24 में करीब 28,000 करोड़ रुपए और वर्ष 2024-25 के लिए 34,201 करोड़ रुपए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 के दौरान जनवरी तक ही सरकार ने 20,770 करोड़ रुपए से अधिक कर्ज लिया था और पूरे वर्ष के लिए यह योजना 49,900 करोड़ रुपए की बनाई गई थी। अब इसमें एक हजार करोड़ रुपए और जोड़ दिए गए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि पंजाब पर बकाया कर्ज 2022 में लगभग 2.82 लाख करोड़ रुपए था, जो बढ़कर अब करीब 4.17 लाख करोड़ रुपए हो गया है और अनुमान है कि यह वर्ष 2026-27 तक 4.48 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
ढिल्लों ने सवाल उठाया कि यदि चार वर्षों में पंजाब की आय लगातार बढ़ रही है, तो फिर सरकार बार-बार नया कर्ज लेने के लिए बाजार की ओर क्यों मुड़ रही है। उन्होंने इसे राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि यह नीति आने वाली पीढ़ियों पर भारी बोझ डाल रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से गुजारिश की कि वे राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति जनता के सामने स्पष्ट करें और कर्ज कम करने के लिए कोई ठोस और विश्वसनीय रोडमैप प्रस्तुत करें। उन्होंने चेतावनी दी कि बार-बार कर्ज लेकर समस्या को और बढ़ाने का कोई समाधान नहीं होगा।
यह मुद्दा पंजाब में वित्तीय स्थिरता के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है, जहां राजनीतिक दलों के बीच आर्थिक प्रबंधन को लेकर तीखी बहस चल रही है। पंजाब भाजपा के आरोपों के बाद सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखने वाली बात होगी।
