हरियाणा को विश्वस्तरीय ज्ञान अर्थव्यवस्था केंद्र बनाने का लक्ष्य: नायब सिंह सैनी

हिसार, हरियाणा। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को राज्य को विश्व स्तरीय ज्ञान अर्थव्यवस्था केंद्र के रूप में स्थापित करने के प्रयासों की जोरदार घोषणा की। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य के शिक्षा तंत्र में ‘पुनर्गठन, पुनर्कल्पना और पुनर्निवेश’ के सिद्धांतों को अपनाया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता में सुधार हो और छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा मिल सके।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयूएसटी), हिसार में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने एनईपी के तहत विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं पर कुल 7.58 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिनमें बालिका छात्रावास, नर्सिंग विभाग भवन, बलिदान स्मृति शिल्प और माता अमृता देवी सर्कल जैसी महत्वपूर्ण निर्माण कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से नर्सिंग ब्लॉक का नाम चौधरी भजनलाल के नाम पर रखने की घोषणा भी की।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूरी देश में लागू किया जा रहा है, जिसका मकसद भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है। इसी कड़ी में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता का नया मापदंड स्थापित किया है, जिसके लिए राज्य सरकार ने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति कार्यान्वयन उत्कृष्टता पुरस्कार 2025 (स्वर्ण श्रेणी) से नवाज़ा है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को प्रदेश के लिए गर्व की बात बताया।

उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय युवा प्रतिभाओं की आशाओं को पूरा करता है और अनुसंधान एवं नवाचार का केंद्र बनकर स्थानीय उद्योगों और वैश्विक प्रौद्योगिकी के बीच सेतु का काम करेगा। यह पहल प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तुत भारत के 2047 तक विकसित और सशक्त राष्ट्र बनने के सपने को साकार करने में सहायक होगी।

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण को भी अपनी प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि माता अमृता देवी और गुरु जंभेश्वर महाराज के आदर्श हमें पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और उसे निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।

नायब सिंह सैनी ने अंत में कहा कि उच्च शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं है, बल्कि एक ऐसी जागरूक, नैतिक और तकनीकी रूप से सक्षम पीढ़ी तैयार करना है जो अपनी संस्कृति से जुड़ी हो और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हो। यह सोच ही हरियाणा को एक विश्वस्तरीय ज्ञान अर्थव्यवस्था केंद्र बनाने में सहायक होगी।

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