चंडीगढ़, पंजाब: पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर विवाद तेजी से बढ़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा जिम्मेदारी देने की संभावनाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक गुट ने इसका कड़ा विरोध किया है। शनिवार को पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल के साथ हुई बैठक में चन्नी गुट के नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि पार्टी को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो कार्यकर्ताओं और पंजाब की राजनीतिक भावना का सच्चा प्रतिनिधित्व करे। उन्होंने राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि उन्हें ‘समझौतावादी नेतृत्व’ स्वीकार नहीं है। वहीं, भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि संगठन को लेकर हाईकमान का फैसला अंतिम माना जाएगा और उसमें बदलाव की संभावना नहीं है।
चन्नी गुट ने बैठक में रखीं अपनी आपत्तियां
पिछले पांच दिनों से पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल की बैठकों से दूरी बनाए हुए चन्नी समर्थक नेताओं ने छठे दिन अपनी बात सामने रखी। कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हुई बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक के दौरान चन्नी ने चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की भी इच्छा जताई और कहा कि वे पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार करेंगे। चन्नी समर्थक नेताओं का मानना है कि आगामी चुनाव को देखते हुए संगठन में ऐसा बदलाव आवश्यक है जिससे कार्यकर्ताओं का भरोसा मजबूत हो सके तथा पार्टी जमीनी स्तर पर सक्रिय बन सके।
तीन सांसदों और नौ विधायकों ने उठाई नेतृत्व बदलाव की मांग
राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में तीन सांसद, नौ विधायक और कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सभी ने राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का विरोध किया। गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि कांग्रेस को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो पार्टी कार्यकर्ताओं और पंजाब की जनता की भावनाओं को समझे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में समय-समय पर निर्णयों की समीक्षा जरूरी होती है और आवश्यकतानुसार बदलाव भी किए जाने चाहिए। बैठक में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, विधायक परगट सिंह, राणा गुरजीत सिंह, पूर्व मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली, ओपी सोनी, पूर्व सांसद मोहम्मद सदीक, विधायक अरुणा चौधरी और वरिंदरमीत सिंह पाहड़ा सहित अनेक नेता मौजूद रहे।
भूपेश बघेल का मिशन था दोनों गुटों में सुलह कराना
पंजाब दौरे पर आए कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल का मुख्य उद्देश्य विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के अंदर चल रहे मतभेदों को दूर करना था और राजा वड़िंग तथा चन्नी गुट को एक साझा मंच पर लाना था। हालांकि, चन्नी गुट की शर्तों के चलते राजा वड़िंग बैठक में शामिल नहीं हो पाए। बैठक के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि सभी नेताओं ने अपनी भावनाएं और सुझाव रखे हैं जिन्हें कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस के पास मुख्यमंत्री पद के लिए अनेक चेहरे हैं और चुनाव संबंधी अंतिम फैसले पार्टी नेतृत्व उचित समय पर करेगा।
नेता प्रतिपक्ष बाजवा ने कहा: हाईकमान को विचार करना चाहिए
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने जोर दिया कि कांग्रेस नेतृत्व को पंजाब के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करना होगा। उन्होंने कहा कि संगठन से जुड़ी सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। चन्नी गुट का मानना है कि आगामी चुनाव में पार्टी को मजबूत स्थिति में ले जाने के लिए संगठनात्मक बदलाव आवश्यक हैं जबकि वड़िंग समर्थक नेता बार-बार नेतृत्व परिवर्तन से चुनावी तैयारियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की चिंता जाहिर कर रहे हैं।
राजा वड़िंग का जवाब: पार्टी में नहीं चलने देंगे गुटबाजी
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस में सभी नेताओं को अपनी बात रखने का अधिकार है और पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं चल सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में न तो कोई ‘स्लीपर सेल’ होनी चाहिए और न ही कोई समझौतावादी नेतृत्व को सहन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी नेता जल्द ही एक मंच पर आएंगे। वड़िंग ने यह भी कहा कि सुखजिंदर सिंह रंधावा उनके साथ साढ़े चार साल तक काम कर चुके हैं और यदि वे समझौतावादी होते तो रंधावा उनके साथ नहीं रहते। साथ ही उन्होंने कहा कि जो लोग भाजपा नेताओं से संपर्क रखते हैं, उनके लिए कांग्रेस में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में बढ़ता यह विवाद पार्टी नेतृत्व के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर चुका है। एक ओर चन्नी गुट संगठनात्मक बदलाव की मांग कर रहा है, वहीं हाईकमान ने अपने फैसले पर अडिग रहने का संकेत दिया है। अब यह देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस नेतृत्व दोनों गुटों के बीच संतुलन कैसे बनाता है और चुनाव से पहले पार्टी की एकजुटता को कैसे कायम रखता है। पार्टी के लिए समय अब महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि गतिरोध नहीं सुलझा तो चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
