अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल लेबनान में इसराइली ‘पायलट क्षेत्र’ वापसी पर चर्चा करेगा: अधिकारी

बेयरुत, लेबनान – 26 जून को हुए एक ढांचा समझौते के तहत, इसराइल धीरे-धीरे लेबनान के दक्षिणी क्षेत्रों से अपनी सेना वापस लेगा, जहां वह ईरान समर्थित शिया आंदोलन हिज़बुल्लाह के खिलाफ तैनात था। यह कदम मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से क्षेत्रीय सुरक्षा में सकारात्मक बदलाव आएगा और लेबनान में स्थिरता स्थापित करने में मदद मिलेगी। इसराइली सैनिकों का यह वापसी क्रमिक होगी, ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके।

हिज़बुल्लाह, जो ईरान का समर्थन प्राप्त एक शक्तिशाली सशस्त्र समूह है, ने इस क्षेत्र में अपने प्रभाव को मजबूत किया हुआ है। इस समझौते का उद्देश्य हिज़बुल्लाह और इसराइल के बीच लंबे समय से कायम तनाव को कुछ हद तक कम करना है, जिससे स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

लेबनान में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रक्रिया पर गहन निगरानी रखने और चर्चा करने के लिए क्षेत्र का दौरा किया है। उनका मानना है कि इसराइली सैनिकों की वापसी से शांति प्रक्रिया में गति आएगी और सभी पक्षों के बीच विश्वास का स्तर बढ़ेगा।

विशेषज्ञ बताते हैं कि इस समझौते के क्रियान्वयन में चुनौतियां आ सकती हैं, क्योंकि क्षेत्रीय राजनीति और बाहरी ताकतों की भूमिका अभी भी जटिल बनी हुई है। हालांकि, इस समझौते को एक उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा रहा है, जो मध्य पूर्व के लिए स्थायी शांति की नींव रख सकता है।

लेबनान की सरकार ने इस समझौते का समर्थन किया है और उसने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने तथा शांति प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच इस तरह के समझौते से भविष्य में संघर्ष के जोखिम को कम करने की उम्मीद जताई जा रही है।

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