मछुआरों की खोज रद्द; तीन सदस्यीय समिति ने आंध्र प्रदेश सरकार को रिपोर्ट सौंपी

विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश – पिछले चार दिनों से चल रही गुमशुदा मछुआरों की खोज अब बिना किसी सफलता के बंद कर दी गई है। राज्य सरकार ने एक तीन सदस्यीय समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए यह निर्णय लिया है कि इन लोगों को मृत माना जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, प्रशासनिक समिति ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में बताया कि गुमशुदा मछुआरों और उनके जहाज के कोई भी अवशेष या चिन्ह नहीं मिले हैं। इस दौरान विभिन्न समुद्री और तटीय क्षेत्रों की exhaustive तलाशी ली गई, लेकिन कोई भी सुराग हाथ नहीं लगा। इस पर प्रत्यक्ष जिम्मेदार मंत्री ने भी स्पष्ट कहा कि स्थिति गंभीर होने के कारण अब और खोज अभियान चलाना व्यर्थ होगा।

मंत्री ने संवाददाताओं को बताया, “चार दिन तक चलाए गए प्रयासों के बावजूद जहाज या मछुआरों के कोई निशान नहीं मिले। प्रशासनिक समिति की रिपोर्ट ने भी यही निष्कर्ष निकाला है कि हमे इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में इन मछुआरों को मृत मानना होगा।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के लिए पूरी सहायता उपलब्ध कराएगी और इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा मानकों को कड़ा करेगी।

परिवारजन और स्थानीय मछुआरे इस निर्णय से दुखी हैं, परंतु वे भी अब वास्तविकता को स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहाकि यह दिन उनके लिए बहुत कष्टदायक है, लेकिन वे उम्मीद करते हैं कि सरकार आगे उचित राहत और समर्थन देगी।

इस बीच, अधिकारियों ने समुद्री सुरक्षा उपकरणों और आपातकालीन संचार साधनों की समीक्षा तेज कर दी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में खोज एवं बचाव अभियान और प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके। विभागीय स्तर पर ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण और संसाधनों के विस्तार पर भी बल दिया जा रहा है।

यह मामला स्थानीय और राज्य सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती रहता है, जिसमें समुद्री सुरक्षा प्रोटोकॉल, मछुआरों की सुरक्षा और संकट प्रबंधन के प्रयासों को अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से सबक लेकर व्यापक कदम उठाना आवश्यक है।

इस प्रकार, आंध्र प्रदेश सरकार ने इस दुखद मामले में अंतिम निर्णय देते हुए अब खोज को समाप्त कर दिया है तथा मछुआरों को मृत घोषित करने की सिफारिश को मान्यता दी है। यह कदम आगे की जांच और ऐसे हादसों की रोकथाम हेतु नीति निर्माण में मार्गदर्शक के रूप में काम करेगा।

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